रायपुर, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित सुयश हास्पिटल में कैंसर का विश्वस्तरीय इलाज होगा। यहां 10 सितंबर 2026 का कैंसर सेंटर आफ अमेरिका समूह ने अपने केन्द्र का शुभारंभ किया। सुयश हास्पिटल और कैंसर सेंटर आफ अमेरिका ग्रुप ने आपस में एमओयू किया है। इस केन्द्र का उदघाटन छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया। इस मौके पर सुयश हास्पिटल के डायरेक्टर डा मनोज लाहोटी, डा नितिन गोयल और डा विवेक केसरवानी के साथ सीसीए की सीईओ स्मिता राजू, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजेश मंथाना उपस्थित रहे।
सुयश हॉस्पिटल के केन्द्र में क्या है खास
- सीसीए रायपुर में कैंसर के इलाज के अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे।
- मेडिकल, रेडिएशन और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के अलावा हेमेटो-ऑन्कोलॉजी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञ भी यहां सेवाएं देंगे।
- जटिल मामलों में विभिन्न विशेषज्ञ मरीज की बीमारी पर मिलकर चर्चा करेंगे और उपचार की दिशा तय करने में सहयोग करेंगे।
- विशेषज्ञों की टीम पहले अमेरिका स्थित ट्यूमर बोर्ड से आनलाइन संपर्क करेगी और बोर्ड के निर्देश के अनुसार इलाज करेगी।
PET-CT और Versa HD रेडिएशन थेरेपी की सुविधा
डा मनोज लाहोटी ने बताया कि इस सेंटर में आधुनिक PET-CT तकनीक उपलब्ध है। इससे कैंसर की पहचान करने, बीमारी की स्थिति का आकलन करने, उपचार की योजना बनाने और इलाज के परिणामों की निगरानी में मदद मिलती है। इसके अलावा यहां Versa HD रेडिएशन थेरेपी की सुविधा भी है। इसके जरिए रेडिएशन उपचार को अधिक सटीक तरीके से देने और आसपास के स्वस्थ ऊतकों पर अनावश्यक प्रभाव को कम करने में मदद मिलने का दावा किया गया है।
जागरूकता और समय पर इलाज जरुरी
डा मनोज लाहोटी ने बताया कि अब ऐसा समय आ गया है कि कैंसर की बीमारी घबराने की जरुरत नहीं है। इलाज की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि मरीज कितना जागरूक है, क्योंकि 80 प्रतिशत बीमारी को केवल जीवनशैली में बदलाव लाकर ठीक किया जा सकता है।
एक और बात यह है कि बीमारी का पता आपको किस स्टेज में चल रहा है। अगर डिटेक्शन अरली है तो इलाज से पूरी तरह रोगी ठीक हो सकता है। अंतिम स्टेज में है तो भी इलाज से उसके जीवन को बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह से प्रिवेंटिनल बीमारी है।
मोटापा से बचें
कैंसर की बीमारी सबसे ज्यादा मोटापा के कारण होना रिसर्च में पाया गया है। डा लाहोटी ने बताया कि शरीर में मोटापा न आने दें। समय-समय पर बीएमआई स्कोर यानि बाडी मास इंडेक्स चेक कराते हैं। अगर बीएमआई 25 के भीतर है तो आप पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
एचपीवी टीक बालकों को भी लगवाएं
डा लाहोटी ने सुझाव दिया कि एचपीवी का टीका प्रत्येक बालक और बालिका को विवाह से पूर्व लगवाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस बात का भी भ्रम है कि एचपीवी का टीका केवल बालिकाओं को ही लगाया जाता है। जबकि ऐसा नहीं है क्योंकि महिलाएं एचपीवी का शिकार पुरुषों से सेक्सुअल संबंध के बाद ही होती हैं। इसलिए यह टीका बालिका और बालक दोनों के लिए जरुरी हैं। तेजी से बढ़ते कैंसर के पीडि़तों की संख्या के बाद अब जरुरी हो गया है कि विवाह से पहले बालक और बालिका दोनों को एचपीवी का टीका लगवाना चाहिए।
