नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026। कांग्रेस सांसद व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष भले ही यूपीआई भुगतान पर शुल्क का विरोध कर रहे हैं पर सच्चाई यह है कि कांग्रेस के सांसदों ने ही इसका समर्थन किया था। कांग्रेस के इन सांसदों में राहुल गांधी के करीबी व पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी शामिल हैं।
बता दें 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) आधारित शुल्क व्यवस्था जिस संसदीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस व्यवस्था को अपनाया गया, उसमें कांग्रेस के 5 सांसद भी शामिल थे। वित्त संबंधी स्थायी समिति में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के गोपीनाथ शामिल थे। 12 अगस्त 2026 को जब समिति की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई, तब भी ये सभी सांसद मौजूद थे।
प्रकाशित कार्यवाही में किसी भी सांसद के असहमति का जिक्र नहीं है। यानी पांचों में से किसी भी कांग्रेस सांसद ने कोई आपत्ति नहीं जताई, जबकि ये सभी रिपोर्ट अपनाए जाने के समय मौजूद थे।
समिति ने यूपीआई के लिए चरणबद्ध एमडीआर व राजस्व व्यवस्था पर जोर दिया था। समिति ने कहा था कि इस व्यवस्था को बिना देरी लागू किया जाना चाहिए। समिति ने चेतावनी दी थी कि अगर यूपीआई और रुपे लेनदेन के लिए एमडीआर संरचना को जल्द लागू नहीं किया गया, तो भुगतान सेवा प्रदाता अपर्याप्त सरकारी सहायता पर निर्भर रह सकते हैं, जिससे साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और नेटवर्क अवसंरचना पर होने वाला खर्च प्रभावित होगा।
कांग्रेस सांसदों द्वारा समर्थन किये जाने का मामला सामने आने के बाद अब भाजपा की ओर से भी कांग्रेस को निशाने पर लिया जा रहा है।
