पूर्व आईपीएस किरण बेदी ने नेता और अफसरों की प्रापर्टी पर उठाया सवाल

नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026। पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी अचानक एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वह दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे के बाद नेता और अफसरों की प्रापर्टी पर सवाल उठाकर चर्चा में आयी हैं। उन्होंने दिल्ली में नेताओं और अफसरो की प्रॉपर्टी को लेकर उच्च न्यायालय से बड़ी मांग किया है। बेदी ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को ऑनलाइन प्रार्थना पत्र लिखा है।

बेदी ने लिखा- सेवा में, माननीय मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय। क्या दिल्ली हाई कोर्ट मौजूदा और पूर्व विधायकों, पार्षदों और एमसीडी के अधिकारियों को यह बताने का निर्देश दे सकता है कि उनके पास या उनके परिवार के नाम पर कौन-कौन सी संपत्तियां हैं? आरोप है कि दिल्ली में ऐसी कई संपत्तियां हैं, जिनके बारे में शक है कि उन्हें कानून और नियमों का उल्लंघन करके हासिल किया गया है या चलाया जा रहा है। चाहे निर्माण का मामला हो या बिजनेस चलाने का। ऐसा सालों से चले आ रहे भाई-भतीजावाद के कल्चर की वजह से हो रहा है। और ये कई कानूनी और सुरक्षा संबंधी चिंताओं की वजह भी बन रही हैं। जबकि भरोसा और उम्मीद किया जाता है कि वे अपने-अपने इलाकों में किसी भी तरह के उल्लंघन को रोकने और कानूनी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए मुख्य रूप से जनता की ओर से निगरानी रखने वाले हैं।

इससे पहले किरण बेदी ने कहा था कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं का मुख्य कारण भ्रष्टाचार और सही प्रबंधन के तौर-तरीकों का अभाव हैं। बेदी ने कहा कि अगर आपके दरवाजे के सामने सीमेंट या रेत का एक भी बैग रखा हो तो एमसीडी के अधिकारियों को उगाही का मौका दिख जाता है। इसलिए यह निगरानी की कमी नहीं है, बल्कि जान-बूझकर अनदेखा करना है। साफ तौर पर दिखता है कि रोजमर्रा के कामकाज में सुपरविजन के स्तर पर जरूरी निगरानी और प्रक्रियाओं की कमी है।

टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल क्यों नहीं

बेदी ने सवाल उठाया कि एमसीडी अपनी निरीक्षण को ट्रैक करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल क्यों नहीं करती? जांच और पुलिस पूछताछ से भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सिफारिशों के पैटर्न का पता चलना चाहिए। इसके फायदा उठाने वाले कौन हैं। वसूली कितनी और किस तरह से की जाती है? बेदी ने कहा कि पिछली जांचों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यह चेतावनियों के बावजूद कार्रवाई नहीं करने की विफलता है। उन्होंने चेतावनियों और जांचों को नजरअंदाज करने के पीछे भ्रष्टाचार के पैटर्न और उसके दायरे की भी जांच की मांग की।

घटनाएं बार-बार क्यों हो रही

किरण बेदी ने कहा कि ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं? यह एक अहम सवाल है। असल में हमारा प्रशासन एक मानव शरीर की तरह है। बेदी ने समझाया कि जिस तरह शरीर में सिर, हाथ, मांसपेशियां और बाकी सब कुछ होता है। सांस इन सभी हिस्सों को जोड़ती है। अगर वह सांस, यानी ऑक्सीजन साफ हो और पूरे शरीर में घूमती रहे तो शरीर स्वस्थ रहता है। इसका मतलब है कि साफ सांस ही हमें एक साथ जोड़े रखती है। जब तक हम प्रशासन को इंसानी शरीर की तरह नहीं देखेंगे, तब तक हमें परेशानी होती रहेगी।

लीडरशिप मिसाल कायम करे

बेदी ने कहा कि हमें ऐसी लीडरशिप चाहिए जो प्रशासनिक सिस्टम को एकजुट रखे। ऐसी लीडरशिप जो मिसाल कायम करे। कोई एक विभाग बेईमानी से काम करे और साथ ही यह उम्मीद करे कि दूसरा विभाग ठीक से काम करता रहे, ऐसा मुमकिन नहीं है। हर सरकारी विभाग को एक संगठित इकाई के हिस्से के तौर पर काम करना चाहिए, तभी हम ऐसी बार-बार होने वाली घटनाओं से बच सकते हैं।