धर्म

विनय-विवेक के बिना धन और यौवन व्यर्थ

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On अक्टूबर 20, 2026
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विनय-विवेक के बिना धन और यौवन व्यर्थ

Highlights

  • मिथ्यात्व के कारण व्यक्ति ऐसे संस्कारों में उलझ जाता है, जिनका प्रभाव उसके वर्तमान जीवन के साथ आगामी भवों पर भी पड़ता है।
  • देव, गुरु और धर्म का सानिध्य मिलने के बाद भी यदि व्यक्ति जिनवचनों का पालन नहीं करता, तो उसका जीवन सुधारना कठिन है।

रायपुर, 20 अक्टूबर 2026। धन के साथ विनय, यौवन के साथ विवेक और शरीर के साथ संयम होना जरूरी है। विनय और विवेक के अभाव में धन उपद्रव का कारण बन सकता है, जबकि विवेक के बिना यौवन व्यक्ति को भटका सकता है। इसी तरह, मोक्ष प्राप्ति का लक्ष्य और संयम नहीं हो तो शीलवान शरीर और मनचाही पात्रता भी आत्मकल्याण में सहायक नहीं बन पाती। जीवन में संसार बढ़ाने के बजाय उसे समेटने का पुरुषार्थ करना चाहिए। मिथ्या ज्ञान से अहंकार पैदा होता है।

विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास के तहत नौ दिवसीय शाश्वत नवपद ओली आराधना के दूसरे दिन सिद्ध पद की आराधना की गई। मुनिश्री संवेगरत्न सागरजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में आयोजित धर्मसभा में मुनिश्री ने सिद्ध पद का महत्व बताते हुए कहा कि आत्मा को कर्मों के बंधन से मुक्त कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए यह आराधना महत्वपूर्ण है।

मुनिश्री ने कहा कि वर्ष में दो बार होने वाली नवपद ओली आराधना आत्मकल्याण का अवसर है। सांसारिक जीवन में रहते हुए भी मर्यादा का पालन और मोहनीय कर्मों का क्षय जरूरी है। मिथ्यात्व के कारण व्यक्ति ऐसे संस्कारों में उलझ जाता है, जिनका प्रभाव उसके वर्तमान जीवन के साथ आगामी भवों पर भी पड़ता है। देव, गुरु और धर्म का सानिध्य मिलने के बाद भी यदि व्यक्ति जिनवचनों का पालन नहीं करता, तो उसका जीवन सुधारना कठिन है। उन्होंने मयना सुंदरी के उदाहरण से लोक संज्ञा पर विजय प्राप्त करने और आराधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

27 अक्टूबर को सामूहिक पारणा

चातुर्मास समिति के महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि नवपद ओली आराधना के दौरान नौ दिनों तक आयंबिल तप किया जा रहा है। इसमें साधक एक समय, एक स्थान पर बैठकर सादा भोजन ग्रहण करते हैं। बिना तेल, मसाले और खटाई के भोजन के साथ छह विगय तेल, घी, दूध, दही, मक्खन और शक्कर का त्याग किया जाता है। प्रत्येक दिन निर्धारित रंग और एक धान के सेवन के नियम का पालन किया जाता है। दूसरे दिन सिद्ध परमात्मा की आराधना के साथ लाल रंग की खाद्य सामग्री ग्रहण की गई। विवेकानंद नगर में 80 श्रावक-श्राविकाएं आयंबिल तप कर रहे हैं। 27 अक्टूबर 2026 को रत्नप्रभुसूरीश्वर भवन में सामूहिक पारणा होगा।

Ramesh Pandey

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रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।