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छत्तीसगढ़ में मानव-हाथी द्वंद रोकने शुरू हुई गजरथ यात्रा

छत्तीसगढ़ में मानव-हाथी द्वंद रोकने शुरू हुई गजरथ यात्रा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हरी झंडी दिखाकर इसकी शुरुआत की

रायपुर, 21 जून 2025। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को जशपुर के रणजीता स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘गजरथ यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर इसकी शुरुआत की। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शुरू की गई यह यात्रा मानव-हाथी द्वंद को कम करने और वन्यजीव संरक्षण के लिए जन जागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मानव और हाथियों के बीच बढ़ते टकराव को रोकने के लिए सामुदायिक जागरूकता और सहभागिता जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा, गजरथ यात्रा लोगों को शिक्षित करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में सार्थक भूमिका निभाएगी। इस अवसर पर उन्होंने वन विभाग द्वारा तैयार लघु फिल्म और पुस्तिका का विमोचन भी किया, जिसमें हाथियों के व्यवहार, सुरक्षा उपायों और सह-अस्तित्व की जानकारी दी गई है। यह सामग्री स्कूलों, ग्राम पंचायतों और हाट-बाजारों में वितरित की जाएगी।

वन्यजीवों के लिए बनाएंगे सुरक्षित वातावरण

अधिकारियों के अनुसार, यह यात्रा स्कूलों, ग्राम पंचायतों और स्थानीय बाजारों में जाकर लोगों को हाथियों के प्रति जागरूक करेगी। यह पहल राज्य सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो सतत विकास, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के जरिए वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के उन कमर्चारियों को भी सम्मानित किया, जिन्होंने इस दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

इन जिलों में मानव-हाथी द्वंद की घटनाएं आम

छत्तीसगढ़ के उत्तरी जिलों जैसे सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर, कोरिया और कोरबा में मानव-हाथी द्वंद की घटनाएं आम हैं। इन घटनाओं में सैकड़ों लोगों की जान गई है, हजारों एकड़ फसलें नष्ट हुई हैं और कई हाथियों की भी मृत्यु हुई है। ‘गजरथ यात्रा’ इस समस्या का समाधान करने और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को हरित और सुरक्षित राज्य बनाने में भी योगदान देगी।