प्रतापगढ़, 21 जून 2025। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की रानीगंज तहसील के भैसौना गांव ने एक बार फिर शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराई है। गांव के मेहुल सिंह ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी 2025) में शानदार प्रदर्शन करते हुए सफलता हासिल की है और एमबीबीएस की सीट पक्की कर ली है।
मेहुल की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव, जिले और प्रयागराज मंडल को गौरवान्वित किया है। भैसौना गांव, जिसे अब डॉक्टर्स की फैक्ट्री के नाम से जाना जाता है, ने पिछले कुछ वर्षों में 12 से अधिक डॉक्टर दिए हैं, और मेहुल की सफलता इस गौरवशाली परंपरा में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ती है।
मेहुल सिंह के पिता, आरके सिंह, भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वर्तमान में रानीगंज के दिलीपपुर में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उनकी माता, डॉ. रेखा सिंह, एक प्रतिष्ठित चिकित्सक हैं, जो क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं। मेहुल के चाचा, डॉ. राजीव सिंह, प्रयागराज के प्रसिद्ध नारायण स्वरूप हॉस्पिटल के संस्थापक और निदेशक हैं। इस परिवार का चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान प्रेरणादायक है। मेहुल ने नीट यूजी 2025 में 99 परसेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक 9800 हासिल की है, जो उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है।
भैसौना गांव की यह उपलब्धि केवल मेहुल तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में इस छोटे से गांव ने चिकित्सा क्षेत्र में एक असाधारण पहचान बनाई है। गांव के डॉ. राजीव सिंह, डॉ. सोनिया सिंह, डॉ. कमल सिंह, डॉ. शालिनी सिंह, डॉ. रेखा सिंह, डॉ. अन्विता, डॉ. श्वेता सिंह, डॉ. राहुल सिंह, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. शिखा सिंह, डॉ. शशी प्रभा सिंह, और डॉ. सचिन सिंह जैसे चिकित्सक पहले से ही स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा, कई युवा नर्सिंग और पैरामेडिकल कोर्स में चयनित होकर इस क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। यह गांव न केवल चिकित्सा, बल्कि शिक्षा और सामाजिक प्रगति का भी प्रतीक बन चुका है।
नारायण स्वरूप हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. राजीव सिंह ने मेहुल की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, मेहुल जैसे समर्पित और प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रयागराज मंडल के स्वास्थ्य तंत्र को और मजबूत करेंगे। यह नई पीढ़ी न केवल अपने सपनों को साकार कर रही है, बल्कि समाज की सेवा के लिए एक प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है। उन्होंने मेहुल को मिठाई खिलाकर और माल्यार्पण कर सम्मानित किया।
डॉ. राजीव ने यह भी कहा कि भैसौना गांव की यह उपलब्धि क्षेत्रीय नवजागरण और शिक्षा के विस्तार का प्रतीक है, जो अन्य गांवों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मेहुल की सफलता की कहानी प्रेरणादायक है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा रानीगंज क्षेत्र के एक स्थानीय स्कूल से पूरी की और फिर नीट की तैयारी के लिए कोटा, राजस्थान में एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया। मेहुल ने बताया कि उनकी सफलता का श्रेय उनके माता-पिता, चाचा डॉ. राजीव सिंह, और कोचिंग संस्थान के शिक्षकों को जाता है।
उन्होंने कहा, मेरे परिवार ने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया और कोटा में अनुशासित पढ़ाई के माहौल ने मेरे लक्ष्य को हासिल करने में मदद की। मेरा सपना है कि मैं एक अच्छा डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करूं, खासकर उन लोगों की, जो बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं।
भैसौना गांव के वरिष्ठ नागरिकों और शिक्षकों ने भी मेहुल की उपलब्धि पर गर्व जताया। गांव के एक वरिष्ठ नागरिक, ने कहा, हमारा गांव छोटा है, लेकिन यहां के युवाओं की प्रतिभा और मेहनत ने इसे देशभर में मशहूर कर दिया है। मेहुल की सफलता हमें गर्व महसूस कराती है। स्थानीय स्कूल के प्रधानाध्यापक ने बताया कि भैसौना के बच्चे शुरू से ही पढ़ाई में रुचि लेते हैं और गांव में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
गांव में चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में हो रही प्रगति का एक बड़ा कारण यहां का सामाजिक और शैक्षिक माहौल है। भैसौना के कई परिवारों ने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया है, और नारायण स्वरूप हॉस्पिटल जैसे संस्थानों ने स्थानीय युवाओं को प्रेरणा दी है। इसके अलावा, गांव के कई युवा कोटा और अन्य शहरों में कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई के लिए जा रहे हैं, जिससे नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में उनकी सफलता की संभावना बढ़ी है।
नीट यूजी 2025 का परिणाम 14 जून 2025 को घोषित हुआ था, और इस बार देशभर में 22.7 लाख अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा में भाग लिया था, जिसमें से 12.36 लाख ने क्वालीफाई किया। मेहुल की ऑल इंडिया रैंक 9800 और 99 परसेंटाइल ने उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट के लिए मजबूत दावेदार बना दिया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ा दी है। परिजनों और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर और माल्यार्पण कर मेहुल का स्वागत किया।
भैसौना गांव की यह उपलब्धि केवल चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। गांव के कई युवा नर्सिंग, पैरामेडिकल, और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में यहां से कई छात्राएं नर्सिंग कोर्स में चयनित हुई हैं, जिसने गांव में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया है। स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि भैसौना के युवाओं में पढ़ाई के प्रति लगन और समाजसेवा का जज्बा शुरू से ही रहा है।













