रायपुर, 11 अगस्त 2025। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट ने फिर नसीहत दी है और हाईकोर्ट जाने को कहा है। सोमवार 11 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल द्वारा प्रिवेंशन आफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धारा 44 के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जांच अधिकारों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि धारा 44 में कोई गलत प्रावधान नहीं है। इस संबंध में यदि दुरुपयोग होता है तो प्रभावित पक्ष हाई कोर्ट का सहारा ले सकता है। न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि कानून में समस्या नहीं, बल्कि इसके दुरुपयोग में होती है।
कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने पीएमएलए की धारा 44 के तहत ईडी को यह अधिकार चुनौती दी थी कि वह मूल शिकायत के बाद दर्ज अन्य शिकायतों के आधार पर धन शोधन से जुड़े मामलों की जांच कर सकती है।
यह मामला छत्तीसगढ़ में बघेल के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर 2,000 करोड़ रुपये की शराब बिक्री से जुड़े धन शोधन के आरोपों से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि इस मामले में अवैध कमीशन की वसूली हुई, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
ईडी इस संदर्भ में विस्तृत जांच कर रही है और इसे लेकर कई पक्षों में राजनीतिक और कानूनी विवाद भी जारी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब भूपेश बघेल को उच्च न्यायालय में यह विवाद उठाना होगा। वहीं, मामला अभी भी जांच के अधीन है और आगे की कारर्वाई हो सकती है।
इस निर्णय से यह साफ हो गया है कि पीएमएलए की धारा 44 की जांच संबंधी शक्तियों को सुप्रीम कोर्ट ने वैध माना है और इसके खिलाफ कोई गंभीर कानूनी बाधा नहीं देखी।













