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7 बड़े बदलाव, सुधरेगी रेल परियोजनाओं में निर्माण की गुणवत्ता

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On मार्च 25, 2026
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7 बड़े बदलाव, सुधरेगी रेल परियोजनाओं में निर्माण की गुणवत्ता

रेल परियोजनाओं में निर्माण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने रेलवे ने 7 बड़े बदलाव किये हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पहला बदलाव पात्रता मानदंडों से जुड़ा है। किसी एक परियोजना के ज़रिए ठेकेदार की क्षमता का आकलन करने की सीमा को परियोजना के मूल्य के 35 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल वही कंपनियाँ ऐसे कामों के लिए बोली लगा सकें जो बड़ी परियोजनाओं को पूरा करने की सिद्ध क्षमता रखती हैं।

इसके अलावा, पिछले अनुभव का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा रेलवे से जुड़े कार्यों में होना ज़रूरी है, क्योंकि यह माना जाता है कि राजमार्ग, बंदरगाह और हवाई अड्डों जैसे अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी अलग-अलग जटिलताएं होती हैं। रेलवे के कार्यों में जटिलता के स्तरों को परिभाषित किया गया है; सिग्नलिंग का काम सबसे जटिल माना गया है, जिसके बाद ओवरहेड इलेक्ट्रिकल और ट्रैक के काम आते हैं, और इसी के अनुसार संबंधित अनुभव की ज़रूरत होगी।

दूसरा बदलाव बोली सुरक्षा को परियोजना के मूल्य के 2 प्रतिशत पर निर्धारित करता है। इसका उद्देश्य बेतुकी बोलियों को हतोत्साहित करना और यह सुनिश्चित करना है कि केवल गंभीर प्रतिभागी ही निविदा प्रक्रिया में शामिल हों।

तीसरा बदलाव ₹10 करोड़ से अधिक की सभी परियोजनाओं के लिए बोली क्षमता के अनिवार्य आकलन की शुरुआत करना है। चौथा बदलाव भ्रष्ट, धोखाधड़ी वाले और प्रतिस्पर्धा-विरोधी तरीकों पर रोक लगाने वाले कड़े दंडात्मक प्रावधानों को लागू करता है।

पांचवां बदलाव किसी भी परियोजना के शुरू होने से पहले विस्तृत कार्य योजना को अनिवार्य बनाता है, जिससे बेहतर निगरानी हो सके और समय पर काम पूरा होना सुनिश्चित हो सके।

छठा बदलाव उप-ठेकेदारी की अनुमत सीमा को 70 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करता है। ठेकेदारों को अब अपने स्वयं के पर्यवेक्षण में कम से कम 60 प्रतिशत काम सीधे तौर पर करना होगा। इससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी और बोली जीतने के बाद ठेकों को दूसरों को सौंपने की प्रथा में कमी आएगी।

सातवां बदलाव ‘प्रीडेटरी बिडिंग’ (अत्यधिक कम बोली लगाने) की समस्या का समाधान करता है। रेल मंत्री ने कहा कि यदि कोई बोली अनुमानित परियोजना लागत से 5 प्रतिशत से अधिक कम है, तो बोली लगाने वाले को अतिरिक्त 5 प्रतिशत की ‘परफॉर्मेंस गारंटी’ (कार्य-निष्पादन गारंटी) देनी होगी। इसका उद्देश्य उन अवास्तविक बोलियों को हतोत्साहित करना है जिनके कारण बाद में विवाद, मध्यस्थता और परियोजना में देरी होती है।

ये बदलाव मिलकर रेल परियोजनाओं को लागू करने की रूपरेखा को मज़बूत बनाते हैं। ये सख़्त नैतिक और दंडात्मक उपायों के ज़रिए पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ाते हैं; सख़्त पात्रता नियमों और कम उप-ठेकेदारी (सब-कॉन्ट्रैक्टिंग) के ज़रिए गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं; और तय बोली सुरक्षा, बोली क्षमता का आकलन, और अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी जैसे तरीकों से परियोजना के समय पर काम पूरा होने को बढ़ावा देते हैं। कुल मिलाकर, इन कदमों का उद्देश्य अधिक जवाबदेह, कुशल और मज़बूत अवसंरचना विकास प्रणाली बनाना है।

Ramesh Pandey

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रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।