लेख

रसोई के लिए आत्मनिर्भरता भारत की नई प्राथमिकता

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On मार्च 25, 2026
1 min read • 1.2k views
रसोई के लिए आत्मनिर्भरता भारत की नई प्राथमिकता

मिडिल ईस्ट के तनाव ने सच सामने ला दिया। इस सच को एक झटके में भारत का हर नागरिक जान गया। आज का सच ये है कि भारत अपनी रसोई के लिए भी पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है। रसोई में हम जो एलपीजी सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं, उसका करीब 65% बाहर से आता है। और उसमें से भी ज़्यादातर पश्चिम एशिया से। मतलब साफ है, आपकी रसोई का चूल्हा सिर्फ एलपीजी गैस से नहीं जलता। उसमें तेल के टैंकर, समुद्री रास्ते, जियोपॉलिटिक्स…सब शामिल होते हैं। यही सबसे बड़ा रिस्क है। पिछले कुछ सालों में दुनिया ने साफ देखा है, जंग सिर्फ बॉर्डर नहीं बदलती…सप्लाई चेन भी हिला देती है।

भारत देश को आजाद हुए 78 वर्ष बीत गये। यह प्रत्येक भारतीय के लिए चिंता की बात है कि आधुनिक भारत में हम रसोई के लिए भी पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हो सके। हम प्राचीन भारत की ओर देखें तो हमारी रसोई पशुपालन और जंगल से पूरी तरह आत्मनिर्भर थी। मिटटी के चूल्हे एलपीजी गैस से नहीं बल्कि गोबर के कंडे और लकडि़यों से जलते थे। भोजन का स्वाद भी अच्छा होता था और सेहत के लिए भी अच्छा था।

आधुनिक भारत में बढ़ती व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और पैसे कमाने की चाहत ने रसोई को पूरी तरह से चपेट में ले लिया। हमने वह दिन भी देखे हैं जब एलपीजी को रसोई तक पहुंचाने में क्या-कया प्रचार किया गया। अनगिनत फायदे गिनाये गये। किंतु उन लोगों ने अपने देश में एलपीजी का विकल्प तैयार करने की नहीं सोची। यह भारत के नुमाइंदों के लिए शर्मनाक है।

आज मिडिल ईस्ट के तनाव ने ये बता दिया कि हम अपनी रसोई तक को अभी आत्मनिर्भर नहीं बना सके हैं और बातें बड़ी-बड़ी करते हैं। देर से ही सही पर अब वक्त आ गया है कि भारत की सरकार अपनी रसोई को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सोचे और इसका विकल्प अपने ही देश में तलाशे ताकि हमें विदेशों का मुंह न ताकना पड़े।

प्रत्येक भारतीय की यही मांग होनी चाहिए कि सरकार कुछ ऐसा करे कि हमें विदेशों पर निर्भर न होना पड़े। सरकार को अब इस दिशा में अपनी प्राथमिकता तय करनी चाहिए और निर्धारित समय सीमा में इस चुनौती का समाधान देना चाहिए।

Ramesh Pandey

Ramesh Pandey

रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।