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अर्पित सर्वेश की तीन भाषाओं में लिखी किताबें दुनिया में सबसे महंगी

प्रतापगढ़, 6 मई 2026। प्रतापगढ़ के युवा साहित्यकार अर्पित सर्वेश का नाम ऐसे प्रतिभाशाली रचनाकार के रुप में सामने आया है, जिन्होंने अपनी मौलिक सोच और नवाचार से नई दिशा दी है। विश्व रिकॉर्ड धारक, बहुभाषी लेखक और प्रयोगधर्मी चिंतक के रूप में पहचान बना चुके अर्पित सर्वेश ने एक बार फिर ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने साहित्य जगत को चौंका दिया है।

अर्पित सर्वेश ने हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी तीनों भाषाओं में अपनी पुस्तकों का प्रकाशन कर उन्हें विश्व की सबसे महंगी पुस्तकों की श्रेणी में शामिल कर दिया है। यह केवल कीमत तय करने का मामला नहीं है, बल्कि यह एक वैचारिक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है, जो यह संदेश देती है कि साहित्य की वास्तविक कीमत उसके विचारों और प्रभाव में निहित होती है।

अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अर्पित सर्वेश ने अपने पिता डॉ. संतोष शुक्ल, माता अनीता शुक्ला, भतीजी ईशा शुक्ला और अपनी प्रकाशक नसेहा जी को दिया है। उनका कहना है कि परिवार का सहयोग और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

मैं क्यों हूं

हिंदी कृति मैं क्यों हूं की कीमत ₹51,99,999 निर्धारित की गई है। यह पुस्तक जीवन के मूलभूत प्रश्नों मैं कौन हूं? और मेरा उद्देश्य क्या है? पर आधारित एक गहन दार्शनिक चिंतन प्रस्तुत करती है। यह कृति पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है और जीवन के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में समझाने का प्रयास करती है।

मी का आहे

मराठी भाषा में प्रकाशित उनकी पुस्तक मी का आहे की कीमत ₹21,99,999 रखी गई है। यह पुस्तक क्षेत्रीय भाषा में वैश्विक सोच का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है। इसमें मराठी की सहजता और गहराई के साथ उच्च स्तरीय विचारों का समन्वय देखने को मिलता है। यह कृति यह संदेश देती है कि भारतीय भाषाएं केवल स्थानीय संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान स्थापित कर सकती हैं।

Why Am I

अंग्रेज़ी भाषा में प्रकाशित उनकी पुस्तक Why Am I की कीमत ₹99,99,999 निर्धारित की गई है, जो इसे विश्व की सबसे महंगी पुस्तकों में शीर्ष स्थान दिलाती है। यह कृति अंतरराष्ट्रीय पाठकों को ध्यान में रखकर लिखी गई है, जिसमें भारतीय दर्शन और आत्म-अन्वेषण को सरल और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुस्तक वैश्विक स्तर पर भारतीय विचारधारा को नई पहचान दिला सकती है।