वीबी-जी राम-जी अधिनियम से गांवों में आएगी खुशहाली: रघुवंशी

रायपुर, 4 जुलाई 2026। वीबी-जी राम-जी अधिनियम से गांवों में खुशहाली आएगी। पात्र श्रमिकों को उनके गांव में ही वर्ष में 125 दिन का रोजगार उपलब्ध होगा। इससे श्रमिकों का पलायन रुकेगा और उन्हें आजीविका के साधन उपलब्ध हो सकेंगे। यह बात डॉ. आनंद रघुवंशी ने कही। वे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), रायपुर रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस के कॉन्फ्रेंस हॉल में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [वीबी-जी राम-जी] अधिनियम, 2025 विषय पर मीडिया वार्ता को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में अधिनियम के उद्देश्यों, प्रमुख प्रावधानों, वित्तीय व्यवस्था, क्रियान्वयन तंत्र तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

डॉ. आनंद रघुवंशी ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान रायपुर के संकाय सदस्य हैं। वे कार्यक्रम में विषय वक्ता के रुप में मौजूद रहे। डॉ. रघुवंशी ने कहा कि वीबी-जी राम-जी अधिनियम केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरणीय स्थिरता, सुशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता को भी सुदृढ़ करना है।

उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों में संचालित कार्यों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, फेस ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली, डिजिटल सॉफ्टवेयर के माध्यम से नियमित निगरानी, प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में अर्थदंड जैसे प्रावधान अधिनियम को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाते हैं।

मीडिया वार्ता में बताया गया कि वीबी-जी राम-जी अधिनियम एक जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू किया गया है। इसके अंतर्गत पात्र ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान की गई है।

अधिनियम का उद्देश्य रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का संवर्धन, कृषि अवसंरचना का विकास, स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण, आजीविका के विविधीकरण तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी, पारदर्शी भुगतान व्यवस्था तथा सामाजिक उत्तरदायित्व पर विशेष बल दिया गया है।

डॉ. रघुवंशी ने अधिनियम के प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि श्रमिकों को अब दो श्रेणी में बांटा गया है। दोनों श्रेणी के श्रमिकों को अलग-अलग रंग के कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। कार्ड को देखकर ही उसकी पहचान कर ली जाएगी कि वह किस श्रेणी का श्रमिक हैं और उसी के आधार पर उसे कार्य में प्राथमिकता दी जाएगी।

श्रमिकों को काम करने पर 7 दिवस के भीतर उनकी मजदूरी आन लाइन डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में अंतरित हो जाएगी। इसके लिए एक ऐसा साफटवेयर विकसित किया गया है जो 15 दिन तक मजदूरी न मिलने की दशा में स्वत: अतिरिक्त राशि को शामिल कर देगा।