छत्तीसगढ़

मन को कुंठा से बाहर निकालती है भक्ति

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On जनवरी 31, 2026
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मन को कुंठा से बाहर से निकालती है भक्ति

रायपुर, 31 जनवरी 2026। विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरू स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने मानसिक शांति और सामाजिक उन्नति के लिए भक्ति के मार्ग को सर्वोत्कृष्ठ बताया है। उन्होंने कहा कि भक्ति की भावना मन को कुंठा से बाहर निकालती है। जिस व्यक्ति के मन में भक्ति की भावना होती है वह न तो कभी डिप्रेशन का शिकार होता है और न ही कभी उसके मन में आत्महत्या करने जैसे विचार उत्पन्न होते हैं। उन्होंने आज के युवा समाज से आह़वान किया कि वे संसार की आपाधापी के बीच अपने को संतुलित करने के लिए भक्ति का मार्ग चुनें।

स्वामी गोविंद देव गिरी शनिवार 31 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मीडिया से रूबरू थे। वे यहां वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर के सामने स्थित होटल बेबीलाल कैपिटल के सभागार में नवधा भक्ति कथा कहेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन श्री सीमेंट लिमिटेड कर रही है।

मीडिया से मुखातिब स्वामी गोविंद देव गिरी ने नवधा भक्ति से लेकर वर्तमान में समाज के ज्वलंत मसलों पर हर सवाल का बड़े ही संयम से संतुलित और सारगर्भित जवाब दिया। उन्होंने रायपुर को स्वामी विवेकानंद की लीला भूमि बताया। उन्होंने नवधा भक्ति के बारे में बताया कि भक्ति के नौ रुप हैं। भगवान राम ने माता शबरी को भक्ति के इन नौ रुपों को बताया था। गोस्वमी तुलसीदास द्वारा रचित राम चरित मानस में इसका उल्लेख है।

भक्त प्रहलाद ने भी भक्ति के इन नौ स्वरुपों के बारे में बताया है जिसका उल्लेख श्रीमदभागवत में आता है। उन्होंने बताया कि श्रवण, कीर्तन, स्मरण, सेवाश्रवण, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्म निवेदन ये भक्ति के नौ रुप हैं। ये मार्ग मनुष्य को सच्चे कर्म और अंतर्मन समर्पण के माध्यम से मुक्ति की ओर ले जाते हैं।

Ramesh Pandey

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रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।