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प्रमोद तिवारी की अगुवाई में विपक्ष ने किया CAPF विधेयक का विरोध

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On अप्रैल 1, 2026
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Opposition to the CAPF Bill

नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2026। संसद के ऊपरी सदन (राज्यसभा) में बुधवार 1 अप्रैल को उस समय भारी राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिली, जब विपक्षी दलों ने CAPF यानि ‘केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (समान्य प्रशासन) विधेयक 2026’ का कड़ा विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद प्रमोद तिवारी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने न केवल विधयेक की प्रतियों का विरोध किया, बल्कि मकर द्वार पर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

जवानों के अधिकारों पर हमला है यह विधेयक

सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए प्रमोद तिवारी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने बहुमत के अहंकार में उन जवानों के अधिकारों को कुचलने का प्रयास कर रही है, जो सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर कर देते हैं।

प्रमोद तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार बहुमत के बल पर CAPF जवानों के अधिकारों को रौंद रही है। यह उन वीरों के साथ घोर अन्याय है जो देश की रक्षा में दिन-रात तैनात रहते हैं। सरकार की यह मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम सदन से लेकर सड़क तक जवानों का हक छीनने की इस कोशिश के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे।

विपक्ष की मुख्य आपत्तियां

विपक्षी दलों का तर्क है कि इस नए विधेयक के माध्यम से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (BSF, CRPF, CISF, ITBP और SSB) के प्रशासनिक ढांचे में जो बदलाव किए जा रहे हैं, वे जवानों के हितों के खिलाफ हैं। विपक्ष के अनुसार:

  • इस विधेयक से बलों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।
  • जवानों की सेवा शर्तों और लाभों में कटौती की आशंका है।
  • प्रशासनिक नियंत्रण के नाम पर जवानों पर अतिरिक्त दबाव डाला जा रहा है।
Ramesh Pandey

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रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।