प्रतापगढ़, 11 जुलाई 2025। यूपी के प्रतापगढ़ जिले में सई नदी के तट पर सुगतानन्द बुद्ध विहार स्थित है। गुरु पूर्णिमा पर यहां श्रद्धा व उल्लास का माहौल रहा। श्रद्धालुओं के द्वारा त्रिशरण, पंचशील, आनापानसति ध्यान साधना व परित्राण पाठ धम्मचक्क पवत्तन सुत्त का संगायन किया गया। कार्यक्रम का बुद्धारम्भ पूज्य भिख्खु धम्मदीप, भन्ते अश्वजित, भंते प्रज्ञा मित्र व भंते संघमित्र पंचवर्गीय भिक्षुओ के द्वारा त्रिशरण, पंचशील व दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम का संयोजन व संचालन करते हुए राकेश कन्नौजिया ने कहा कि महाकारुणिक सम्यकसम्बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के दो महीने बाद आज आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन सारनाथ मृगदाव के वन में पंच्चवर्गीय भिक्खुओं कौण्डिन्य, वप्प, भद्दीय, अस्सजि, और महानाम को अपना प्रथम ऐतिहासिक उपदेश दिया। उपदेश सुनने के बाद उनके पांच शिष्यों ने तथागत बुद्ध को अपना शास्ता, मार्ग दिखाने वाला (गुरू) स्वीकार किया था। जिसके कारण इस पूर्णिमा को गुरू पूर्णिमा भी कहते हैं।
इसे बौद्ध आध्यात्मिक जगत में धम्म चक्क प्रवत्तन दिवस कहा गया। इस अवसर पर परम पारंपरिक श्वेत वस्त्रों में उपासक व उपासिकाओं ने उपोसथ धारण करते हुए पंच्चवर्गीय भिक्खुओं व आचार्य उमेश चन्द्र, गया प्रसाद स्वावलम्बी, राजीव के नेतृत्व में धम्मचक्क पवत्तन सुत्त का सामूहिक संगायन कर बोधिपूजा, सामूहिक ध्यान साधना, दीपदानोत्सव में शामिल होते हुए वृक्षारोपण कर प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश।
अध्यक्षता कर रही मखदूम प्रसाद ने कहा कि आज के ही दिन से भिक्खु संघ का पावन वर्षावास का अधिष्ठान भी शुरू किया जाता है। पूज्य भिख्खु धम्मदीप ने कहा इसी दिन भगवान बुद्ध के महानिर्वाण के एक माह बाद पाच सौ अर्हत भिक्खुओं की पहली धम्म संगीति यानी कॉन्फ्रेंस राजगीर की सप्तपर्णी गुफाओं में हुई थी।
सुरेन्द्र कुमार विमल ने कहा कि आज ही के दिन सिद्धार्थ गौतम ने माता महामाया की कोख में गर्भ धारण किया था ।
इस अवसर पर आभार व्यक्त करते हुए वेद प्रकाश ने कहा कि आज ही के दिन राजकुमार सिद्धार्थ ने लोक कल्याण की भावना से गृहत्याग अर्थात महाभिनिष्क्रमण किया था |
इस अवसर पर डॉ. सममित्र गुप्ता, रामप्यारी, वेद प्रकाश, जितेंद्र बहादुर यादव, मखदूम प्रसाद मैनेजर, बसंत लाल मौर्य, विनोद सरोज, प्रदीप सरोज, दिनेश चौधरी, अवनीश चौधरी, विजय शंकर कनौजिया, चंद्रकेश मौर्य, रंजू बौद्ध, विजय शंकर, राकेश बौद्ध, ओम प्रकाश, राम सजीवन सरोज आदि उपासक गण मौजूद रहे।