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सुरुचि सिंह ने ISSF विश्व कप में तीन स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास

नई दिल्ली, 22 जून 2025। भारतीय निशानेबाजी में एक नया सितारा उभरा है, जिसका नाम है सुरुचि सिंह। मात्र 19 वर्ष की आयु में, इस युवा निशानेबाज ने म्यूनिख, जर्मनी में आयोजित ISSF विश्व कप 2025 में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह उनकी लगातार तीसरी व्यक्तिगत विश्व कप स्वर्ण पदक जीत है, जो उन्होंने ब्यूनस आयर्स, लीमा और अब म्यूनिख में हासिल की। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल भारत का नाम रोशन किया, बल्कि भारतीय निशानेबाजी में एक नए युग की शुरुआत की है।

हरियाणा के झज्जर की रहने वाली सुरुचि ने फाइनल में 241.9 का शानदार स्कोर बनाकर फ्रांस की अनुभवी निशानेबाज कैमिल जेड्रेजेव्स्की को महज 0.2 अंकों के अंतर से पछाड़ा। कैमिल ने 241.7 अंकों के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि चीन की याओ कियानक्सुन ने 221.7 अंकों के साथ कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। सुरुचि की यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में 588 का स्कोर बनाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड की बराबरी की, जो ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के नाम दर्ज है।

सुरुचि की इस जीत का महत्व केवल एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है। इस सीजन में वह 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में अजेय रहीं और उन्होंने कुल चार स्वर्ण पदक (तीन व्यक्तिगत और एक मिश्रित टीम में) अपने नाम किए। म्यूनिख विश्व कप में उनकी जीत ने भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया और भारतीय निशानेबाजी दल का मनोबल बढ़ाया। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि भारतीय महिला निशानेबाज अब विश्व मंच पर लगातार अपना दबदबा कायम कर रही हैं।

सुरुचि की सफलता का राज उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता है। उन्होंने अपनी जीत के बाद कहा, यह मेरे तीन विश्व कप फाइनल्स में सबसे करीबी मुकाबला था, और मुझे लगता है कि मैं थोड़ी भाग्यशाली भी थी। उनकी यह विनम्रता और खेल के प्रति समर्पण उन्हें अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनाता है। सुरुचि ने यह भी बताया कि उनके कोच और परिवार का समर्थन उनकी इस यात्रा में महत्वपूर्ण रहा है।

इस जीत की सराहना देश भर में हो रही है। ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने सुरुचि की तारीफ करते हुए कहा, वह एक असाधारण प्रतिभा हैं और भारतीय निशानेबाजी के लिए एक बड़ा नाम बनेंगी। राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) के अधिकारियों ने भी उनकी इस उपलब्धि को भारतीय खेलों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण बताया। सुरुचि की इस जीत ने न केवल भारत का गौरव बढ़ाया, बल्कि यह भी दिखाया कि छोटे शहरों से निकलकर भी विश्व स्तर पर कामयाबी हासिल की जा सकती है।