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भारतीय वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह के समान कुछ स्थलों की पहचान की

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On अक्टूबर 17, 2026
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भारतीय वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह के समान कुछ स्थलों की पहचान की

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026। तमिलनाडु और चिली के अटाकामा रेगिस्तान के क्षेत्रों में दो प्रमुख खनिजों की पहचान की गई है। मंगल ग्रह के साथ इन क्षेत्रों की भूवैज्ञानिक, रासायनिक और भौतिक समानताओं के आधार पर इन्हें मंगल ग्रह के अनुरूप स्थल के रूप में स्थापित करने में मदद मिली है।

ग्रहों की गहन खोज के इस दौर में, पृथ्वी पर मंगल ग्रह के समान स्थलों की पहचान करना एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि केवल कक्षीय आंकड़ों के आधार पर मंगल ग्रह के खनिजों का पूरी तरह से आकलन नहीं किया जा सकता। इन अध्ययनों के लिए उच्च परिशुद्धता वाले अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरण आवश्यक हैं।

केरल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में स्थित डीएसटी-एफआईएसटी द्वारा समर्थित लेजर रमन स्पेक्ट्रोमीटर सहित उन्नत उपकरणों की मदद से तमिलनाडु के नेवेली में मेलेंटेराइट और चिली के अटाकामा रेगिस्तान तथा तिरुचिरापल्ली बीहड़ों में जिप्सम की पहचान की गई है। तिरुचिरापल्ली बीहड़ तमिलनाडु का अर्ध-शुष्क भूगर्भीय और पुराजलवायु क्षेत्र है।

ये दोनों खनिज जलयुक्त सल्फेट हैं जो जल-चट्टान अंतःक्रियाओं को दर्शाते हैं। जिप्सम अतीत के जलीय वातावरण के प्रमाणों को संरक्षित करता है, जबकि मेलेंटेराइट क्षणिक नम, अम्लीय और ऑक्सीकरण स्थितियों को इंगित करता है, जो मंगल ग्रह पर अनुमानित प्रक्रियाओं से संबंधित हैं।

केरल विश्वविद्यालय के शोध दल ने, परियोजना समन्वयक, डीएसटी-एफआईएसटी के नेतृत्व में, इन खनिजों की पहचान की। डीएसटी-एफआईएसटी द्वारा समर्थित लेजर रमन स्पेक्ट्रोमीटर का उपयोग खनिजों के विशिष्ट स्पेक्ट्रल फिंगरप्रिंट का पता लगाने और उनकी पहचान की पुष्टि करने के लिए किया गया था। मेलान्टेराइट सल्फाइड के ऑक्सीकरण के माध्यम से अल्पकालिक आर्द्र परिस्थितियों के प्रमाण प्रदान करता है।

यह प्रक्रिया मंगल ग्रह पर सल्फेट के निर्माण को समझने के लिए प्रासंगिक है। वहीं, जिप्सम अतीत में जल की सक्रियता के प्रमाण देता है और अपने खनिज मैट्रिक्स में जैविक संकेतों को संरक्षित रख सकता है। इस प्रकार, पृथ्वी पर पाए जाने वाले ये खनिज मंगल ग्रह पर अतीत में जल की सक्रियता और संभावित रूप से जीवन के अनुकूल रहे वातावरण को समझने में उपयोगी अनुरूप उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इन निष्कर्षों को ग्रह विज्ञान की एक प्रमुख पत्रिका, जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: प्लैनेट्स में दो शोध पत्रों के रूप में प्रकाशित किया गया है।

शोध दल अब इसी सुविधा का उपयोग करते हुए खगोलजीवविज्ञान संबंधी अध्ययनों के लिए आदिम जीवन को समझने के उद्देश्य से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चरम परिस्थितियों वाले दुर्लभ अनुरूप स्थलों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

डीएसटी-एफआईएसटी द्वारा समर्थित ऐसी सुविधाएं मंगल और अन्य ग्रहों पर अतीत के रहने योग्य वातावरणों की हमारी समझ को बेहतर बनाकर ग्रह विज्ञान को आगे बढ़ा सकती हैं। जल की सक्रियता के प्रमाण संजोने और जैविक संकेतों को संरक्षित रखने में सक्षम खनिजों की पहचान से भविष्य के ग्रह अभियानों को पृथ्वी से परे जीवन के साक्ष्य खोजने के लिए सबसे संभावित स्थलों की ओर निर्देशित करने में भी मदद मिल सकती है।

Ramesh Pandey

Ramesh Pandey

रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।