प्रतापगढ़, 23 जून 2026। प्रतापगढ़ जनपद के महाभारत कालीन यक्ष-युधिष्ठर संवाद स्थल अजगरा निवासी सुप्रसिद्ध कवि एवं पुरातत्व विद पं. राजेश कुमार पाण्डेय उर्फ निर्झर प्रतापगढ़ी ने अजगरा क्षेत्र से कई महत्वपूर्ण प्राचीन पांडुलिपियों की खोज कर उन्हें संग्रहीत किया है।
इनमें सर्वाधिक पुरानी पांडुलिपि जिसकी माप 33×13 से.मी. व प्राचीनता सन 1270 स्पष्ट है। इसी प्रकार अन्य पांडुलिपियों की माप क्रमशः 19×10से.मी., 25×10 से.मी., 24×11 से.मी., 34.5×12से.मी. 20×14से.मी. एवं 23×15से.मी. है। ये सभी पांडुलिपियां बादामी रंग के मटमैले जीर्ण-शीर्ण कागज पर हांथ से लिखी गई हैं जिनकी लिपि मुड़ुवा देव नागरी है। पर ये कुछ को छोड़कर अस्पष्ट एवं अपठनीय हैं।
वर्ष 2005 में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन द्वारा चलाए गए पांडुलिपियों की खोज के अभियान में भी निर्झर प्रतापगढ़ी द्वारा प्रतापगढ़ जनपद से सर्वाधिक 84 पांडुलिपियों की खोज की गई थी। इस योगदान पर इन्हें जिलाधिकारी प्रतापगढ़ द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया था।
वर्तमान समय में भी पुनः भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने ज्ञान भारतम् योजना के तहत प्राचीन पांडुलिपियों की खोज का अभियान चला रखा है जिसके तहत यह कार्य किया गया है।
