प्रतापगढ़, 5 नवंबर 2025। यूपी के प्रतापगढ़ जिले में युवा जोश व्हाट्सएप ग्रुप सामाजिक क्रांति का प्रतीक बन गया है। डिजिटल युग में सोशल मीडिया को अक्सर नकारात्मकता के चश्मे से देखा जाता है। फेक न्यूज, साइबर बुलिंग और व्यर्थ की बहसें। लेकिन उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के तीन युवा पत्रकारों राज नारायण शुक्ल राजन, रवि प्रकाश सिंह चंदन और रोहित सिंह ने इसका एक ऐसा चेहरा दिखाया है, जो न केवल प्रभावशाली बल्कि बेहद शक्तिशाली साबित हुआ।
दस वर्ष पूर्व, इन युवाओं ने ‘युवा जोश और बेहतर सोच’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसमें सकारात्मक विचारों वाले लोगों को जोड़ा। आज यह ग्रुप मात्र सदस्यों का संग्रह नहीं, बल्कि एक विशाल सामाजिक परिवार बन चुका है, जो समाज को नई दिशा दे रहा है। बुधवार 5 नवंबर 2025 को बीएसएस एकेडमी फुलवारी में आयोजित इसके 10वें वार्षिकोत्सव ने इसकी प्रेरणादायी यात्रा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
काव्य पाठ, विचार संगोष्ठी और भावुक संवादों से सजे इस आयोजन ने साबित कर दिया कि सोशल मीडिया सकारात्मक उपयोग से समाज में क्रांति ला सकते हैं। प्रतापगढ़, प्रयागराज मंडल का एक ऐसा जिला जहां ग्रामीण संस्कृति और आधुनिकता का संगम है। यहां की मिट्टी में स्वतंत्रता संग्राम की गूंज अभी भी बाकी है, लेकिन युवाओं के बीच बेरोजगारी, सामाजिक विषमताएं और डिजिटल विभाजन जैसी चुनौतियां भी कम नहीं।
ऐसे में राज नारायण शुक्ल राजन, रवि प्रकाश सिंह चंदन और रोहित सिंह जैसे युवा पत्रकारों ने चुनौती को अवसर में बदल दिया। राजन, जो स्थानीय मीडिया में सक्रिय हैं, ने बताया, 2015 में हम तीनों ने महसूस किया कि सोशल मीडिया पर नकारात्मकता हावी है। हमने सोचा, क्यों न एक ऐसा मंच बनाएं जहां सकारात्मकता का संचार हो। शुरू में ग्रुप में परिवार और मित्र जोड़े गए। धीरे-धीरे, सकारात्मक पोस्ट्स, प्रेरक उद्धरण, सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता, शिक्षा और स्वास्थ्य टिप्स ने लोगों को आकर्षित किया।
आज ग्रुप के सदस्य प्रतापगढ़ से लेकर दिल्ली-मुंबई तक फैले हैं। यह ग्रुप न केवल विचारों का आदान-प्रदान करता है, बल्कि वास्तविक बदलाव भी लाता है। यह ग्रुप सामाजिक परिवार बनने की प्रक्रिया आसान नहीं थी। शुरुआती दिनों में सदस्यों को जोड़ना चुनौतीपूर्ण था। रवि प्रकाश सिंह चंदन, जो ग्रुप के संयोजकों में प्रमुख हैं, ने साझा किया, हमने नियम बनाए—केवल सकारात्मक पोस्ट, कोई राजनीतिक विवाद या नफरत फैलाने वाली सामग्री नहीं। इससे सदस्यों में विश्वास बढ़ा।
ग्रुप से निकले विचार फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर वायरल हुए, जिससे लाखों लोगों तक पहुंच बनी। वास्तव में, यह ग्रुप सोशल मीडिया के सकारात्मक प्रभाव का जीता-जागता उदाहरण है। जैसा कि एक हालिया अध्ययन में उल्लेखित है कि सोशल मीडिया युवाओं को अभिव्यक्ति का माध्यम देता है, जिससे सामाजिक बदलाव संभव होता है।
सोशल मीडिया की सकारात्मक पहल से बदलाव संभव : प्रो. प्रदीप सिंह
10वें वार्षिकोत्सव का आयोजन बीएसएस एकेडमी फुलवारी में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसमें मुख्य अतिथि प्रो. प्रदीप कुमार सिंह, महाविद्यालयीय शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री, ने भाग लिया। प्रो. सिंह ने कहा, यह आयोजन समाज को दिशा देने वाला संगठन बनेगा। सोशल मीडिया की सकारात्मक पहल से बदलाव संभव है। युवाओं ने दिखा दिया कि डिजिटल टूल्स से सामाजिक एकता मजबूत हो सकती है। उनके शब्दों ने माहौल को भावुक कर दिया।
काव्य संगोष्ठी का सत्र सबसे यादगार रहा
काव्य एवं विचार संगोष्ठी का सत्र सबसे यादगार रहा। साहित्य प्रेमी सदस्य सर्वेश सिंह ने अपनी रचना सुनाई: जिनके नाम के पत्थर तर जायेंगे, वो हाथ छोड़ दे तो हम किधर जायेंगे। लंका सोने की हो भले मगर भरत नहीं मिलेंगे तो राम मर जायेंगे। यह पंक्तियां मानवीय संबंधों की गहराई को छू गईं, और सभागार तालियों से गूंज उठा।
राजमूर्ति सिंह सौरभ ने प्रस्तुत किया: दुनिया में इंसान के दो ही सच्चे मित्र, अपनी अंत: चेतना, अपना धवल चरित्र। यह कविता नैतिकता पर केंद्रित थी, जो ग्रुप के मूल मंत्र से मेल खाती थी। सुनील प्रभाकर की पंक्तियां—हमारे हाथ में पत्थर नहीं है, हमारे मन में कोई डर नहीं है। जरायम की गली से रोज गुजरा, कोई इल्जाम मेरे सर नहीं है ने युवा जोश को जगाया।
राज नारायण शुक्ल राजन ने अपनी कविता से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया: राम और रहमान की बातें, गीता और कुरान की बातें। बैठा-बैठा सोच रहा हूं, कब होगी इंसान की बातें। यह रचना धार्मिक सद्भाव पर व्यंग्य थी, जो आज के ध्रुवीकरण को चुनौती देती थी। निर्झर प्रतापगढ़ी ने नेताओं की शैली पर हल्का व्यंग्य किया, जिससे सभागार हंसी से गूंजा।
डॉ. अनूप सिंह प्रतापगढ़िया ने राजनीति में गिरावट पर कटाक्ष किया: राजनीति अब सेवा नहीं, स्वार्थ का बाजार बन गई है। उनकी हास्यपूर्ण प्रस्तुति ने गंभीर मुद्दों को हल्का बनाया। विचार संगोष्ठी में अन्य वक्ताओं ने भी योगदान दिया।
प्रो. शक्ति कुमार पांडेय ने कहा, यह कार्यक्रम नवाचार है। सामाजिक, सांस्कृतिक क्षेत्र में यह परिवार बेहतर कार्य करेगा। संजीव आहूजा ने सोशल मीडिया के भविष्य पर चर्चा की, जबकि इतिहासकार प्रो. पीयूष कांत शर्मा ने ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ते हुए बताया, स्वतंत्रता संग्राम में भी पत्रकारिता ने भूमिका निभाई; आज डिजिटल पत्रकारिता वही कर रही है। विनोद कुमार सिंह ने युवाओं की भूमिका पर जोर दिया, पीजी कॉलेज पट्टी के प्राचार्य प्रो. अखिलेश पांडेय ने शिक्षा और सोशल मीडिया के संयोजन पर विचार साझा किए।
अजय सिंह रिंटू, राजेंद्र सिंह और प्रो. उपेंद्र कुमार सिंह ने सामाजिक एकता पर बल दिया। संयोजक रवि प्रकाश सिंह चंदन और रोहित सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। चंदन ने कहा, यह ग्रुप हमारा परिवार है। दस वर्षों में हमने न केवल विचार साझा किए, बल्कि जीवन बदले। रोहित सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, सकारात्मक सोशल मीडिया ही भविष्य है।
कार्यक्रम में डॉ. दिलीप सिंह, सूरज मिश्र, विश्व हिंदू महासंघ के मंडल प्रभारी अनुज सिंह, अतुल सिंह, अजीत सिंह, सोनू मिश्र, अफसार अहमद, अजय सिंह, धर्मेंद्र सिंह, संदीप शर्मा, धमर्राज मौर्य और शिवम शुक्ला जैसे गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले सदस्यों का हुआ सम्मान
समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवा जोश और बेहतर सोच समूह के सदस्यों को सम्मानित किया गया। महिला शिक्षा, उत्थान के लिए पर्वतपुर ग्राम प्रधान राजेंद्र प्रताप सिंह बबऊ, समाज में नवाचार के लिए राजेश पांडेय निर्झर प्रतापगढ़ी, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिव प्रताप सिंह, शिक्षा के विकास में योगदान के लिए अनूप तिवारी जेठवारा, विनोद सिंह फुलवारी, अवधी के विकास के लिए लोकगायक संतोष यादव, सामाजिक सद्भाव के लिए सलमान खान एवं पर्यावरण संरक्षण, महिला स्वास्थ्य जागरूकता के लिए रोहित सिंह को सम्मानित किया गया।














