नई दिल्ली, 28 मार्च 2026। भारतीय रेलवे ने विज्ञापन और ब्रांडिंग पहलों के माध्यम से गैर-किराया राजस्व अर्जित करने के लिए व्यापक गैर-किराया राजस्व (एनएफआर) नीतियां बनाई हैं। आउट-ऑफ-होम (ओओएच) विज्ञापन नीति के अंतर्गत, स्टेशनों के आवागमन क्षेत्रों में विज्ञापन के अवसर उपलब्ध हैं। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि रेल डिस्प्ले नेटवर्क (आरडीएन) नीति स्टेशनों और आवागमन क्षेत्रों में स्क्रीन और डिस्प्ले प्रणाली के माध्यम से डिजिटल विज्ञापन को सक्षम बनाती है। इसके अतिरिक्त, मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत रेलगाड़ियों और डिब्बों (अंदर और बाहर दोनों) जैसी चल संपत्तियों का उपयोग ब्रांडिंग और विज्ञापन के लिए किया गया है।
विज्ञापन से अर्जित राजस्व विविध राजस्व का एक हिस्सा है। खंडवार राजस्व विवरण भारतीय रेलवे के वार्षिक सांख्यिकी विवरण में उपलब्ध है।
सभी विज्ञापन अनुबंध भारतीय रेलवे ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम (आईआरईपीएस) ऑनलाइन पोर्टल पर ई-नीलामी के माध्यम से दिए जाते हैं। बोलीदाता का चयन वाणिज्यिक आय और गैर-किराया राजस्व नीति तथा संबंधित अनुबंध की विशेष शर्तों के अनुसार किया जाता है, जो विज्ञापनदाताओं के लिए पात्रता मानदंड निर्धारित करती हैं।
रेलगाड़ियों में प्रदर्शित विज्ञापनों के लिए, प्रत्येक विज्ञापन योजना की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है और इसे संबंधित रेलवे मंडल के मंडल प्राधिकरण के कार्यालय में जमा करना होता है। हालांकि, विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए ब्रांड का चयन विज्ञापन एजेंसी का विशेषाधिकार है। विज्ञापन एजेंसियों को विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए केंद्र/राज्य के कानूनों का पालन करना अनिवार्य है। कानून की दृष्टि से आपत्तिजनक विज्ञापन प्रतिबंधित हैं।
ये विज्ञापन प्रतिबंधित
- मदिरा के विज्ञापन
- कामुक पृष्ठभूमि वाले विज्ञापन
- अन्य परिवहन साधनों के प्रतिस्पर्धी विज्ञापन
- रेलवे दुर्घटनाओं के लिए बीमा पॉलिसी देने वाली निजी बीमा कंपनियों के विज्ञापन
- सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन
- किसी भी उल्लंघन की स्थिति में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।
Read More : रेलवे में 11000+ असिस्टेंट लोको पायलट की होगी भर्ती, शॉर्ट नोटिफिकेशन जारी














