रायपुर, 2 अप्रैल 2026। साहित्य केवल शब्दों का मायाजाल नहीं, बल्कि समाज का वह दर्पण है जिसमें हमारी संवेदनाएं और परंपराएं साफ झलकती हैं। इसी सजीव चित्रण को चरितार्थ करते हुए राजधानी रायपुर में श्रीमती आशा पाठक ‘बिट्टी’ के कहानी संग्रह आशाजीत का गरिमामय विमोचन संपन्न हुआ। यह पुस्तक कोरी कल्पनाओं का पुलिंदा नहीं, बल्कि लेखिका के जीवन के अनुभवों, सामाजिक उतार-चढ़ाव और मानवीय रिश्तों का एक मार्मिक दस्तावेज है।
रिश्तों और संवेदनाओं का अनूठा संग्रह
92 पन्नों का यह कहानी संग्रह अपने भीतर 27 ऐसी कहानियों को समेटे हुए है, जो सीधे पाठकों के हृदय पर दस्तक देती हैं। पुस्तक में शामिल कहानियां जैसे बचपन की यादें, भूख, राह देखती मां, काकाजी की छड़ी, चौखट, चवन्नी और चलो कहीं और चलें वर्तमान समय में दम तोड़ते सांस्कृतिक मूल्यों और पारिवारिक संवेदनाओं को जीवंत करती हैं। लेखिका ने रिश्तों की बारीकियों और परंपराओं के निर्वहन को बहुत ही सहजता से पिरोया है।
सरलता में छिपा गहरा अर्थ
आशाजीत की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भाषा शैली है। लेखिका ने हिंदी के साथ-साथ खड़ी बोली के शब्दों का प्रयोग कर पात्रों के भावनात्मक पक्ष को और अधिक निखारा है। आम बोलचाल के शब्दों के प्रयोग ने लेखन को इतना सरल बना दिया है कि हर पाठक खुद को कहानी के चरित्रों से जुड़ा हुआ महसूस करता है। कहानियों में निराशा के बीच ‘आशा’ की किरण का दिखना और नायक-नायिका का अपनी मंजिल तक पहुंचना, इस शीर्षक की सार्थकता को सिद्ध करता है।
दिग्गजों की रही उपस्थिति
वेंकटेश साहित्य मंच के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर की नामचीन हस्तियों ने शिरकत की। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने लेखिका के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस उम्र में लेखन और उसका प्रकाशन परिवार का एक सराहनीय कदम है। हर कहानी में गहरी संवेदनाएं हैं। लेखक का पहला प्रकाशन उसकी जिम्मेदारी होती है, लेकिन अगला प्रकाशन पाठकों की जिम्मेदारी बन जाता है।
प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल (कुलपति, रवि वि.) ने आशाजीत को एक पारिवारिक और सामाजिक सूत्र वाक्य बताते हुए कहा कि इस पुस्तक को घर-घर तक पहुँचाया जाना चाहिए। शशांक शर्मा (अध्यक्ष, हिंदी ग्रंथ अकादमी) ने संग्रह की लघु कथाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि लेखिका ने कम शब्दों में बहुत बड़ी और गहरी बातें कही हैं। वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने कहा कि पारंपरिक शब्दावली के माध्यम से लेखिका ने गांव और समाज की मर्मस्पर्शी तस्वीर उकेरी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य अमरनाथ त्यागी ने की, जबकि पुस्तक की विस्तृत समीक्षा डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का आगाज़ एक शानदार कवि सम्मेलन से हुआ, जिसमें गाजियाबाद, मथुरा और मध्य प्रदेश के सीधी से आए प्रख्यात कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया।