आईआईएम रायपुर में डॉ. जयशंकर ने मेधावियों को बांटी डिग्री, किया मोटिवेट

रायपुर, 4 अप्रैल 2026। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार 4 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में
भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में पहुंचे। यहां उन्होंने 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि 552 छात्रों को डिग्री प्रदान की। इनमें प्रमुख एमबीए प्रोग्राम के 314, एग्जीक्यूटिव एमबीए प्रोग्राम के 230 और 8 डॉक्टरेट शोधार्थी शामिल थे। डॉ. एस. जयशंकर ने अपने संबोधन में मेधावियों को मोटिवेट किया।

उन्होंने कहा, स्नातक होने वाले इस बैच को खुद को भाग्यशाली मानना चाहिए, क्योंकि यह उस पीढ़ी का हिस्सा है जो ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नियत है। आप एक दशक की ठोस प्रगति और विकास के लाभार्थी हैं। आपको तकनीक और सूचना तक वह पहुंच प्राप्त हुई है, जिसकी कल्पना एक पीढ़ी पहले करना भी असंभव था। यही नहीं, आप वैश्वीकरण के उस युग में बड़े हुए हैं जिसने आपको शेष विश्व के साथ बहुत गहराई से जोड़ा है। आज, भारत अपनी विकास यात्रा में एक लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है। आपका यह समूह उन लोगों में शामिल होगा जो इस प्रयास का नेतृत्व करेंगे। आपके कौशल हमारे राष्ट्र को समृद्धि की खोज में आगे ले जाने में मदद करेंगे।

डॉ. जयशंकर ने कहा

  • यह स्वीकार किया जाना चाहिए कि आज भारत में स्नातक होने वालों की संभावनाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक उज्ज्वल हैं।
  • हमारे समाज में एक ऐसा आशावाद है जो दुनिया के कई अन्य हिस्सों में नहीं दिखता।
  • पिछले दस वर्ष बहुत बेहतर रहे हैं, जिससे यह विश्वास पैदा हुआ है कि अगले दस वर्ष और उसके बाद का समय भी वैसा ही होगा।
  • हम अब दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं।
  • कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि हाल के कई वैश्विक झटकों ने हमारी लचीलेपन (resilience) की परीक्षा ली है।
  • भारत उससे मजबूती से बाहर निकला है।
  • हमने घरेलू और बाहरी दोनों चुनौतियों का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है।

रणनीति मायने रखती है, लेकिन गति उससे भी अधिक महत्वपूर्ण

आईआईएम रायपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष पुनीत डालमिया ने कहा, 2026 के बैच, आप गहरे वैश्विक बदलाव के क्षण में स्नातक हो रहे हैं। हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल व्यवधान, भू-राजनीतिक बदलाव और तेजी से बदलते उपभोक्ता व्यवहार वाले युग में जी रहे हैं। ऐसी दुनिया में ज्ञान महत्वपूर्ण है, लेकिन अनुकूलन क्षमता (adaptability) अनिवार्य है। रणनीति मायने रखती है, लेकिन गति उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

महत्वाकांक्षा आवश्यक है, लेकिन सत्यनिष्ठा (integrity) पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जीवन भर सीखने वाले बने रहें, ईमानदारी के साथ नेतृत्व करें और स्वयं से परे प्रभाव पैदा करें। आपका मूल्यांकन आपके पद या वेतन से नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में आपके द्वारा लाए गए बदलाव से किया जाएगा।

दीक्षांत समारोह का समापन शिवांग छिकारा, शालिनी दुबे और बोबन चाको सहित अन्य मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान करने के साथ हुआ।