नई दिल्ली, 25 मई 2026। देशभर में महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को सोमवार 25 मई 2026 को एक और बड़ा झटका लगा। तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें सोमवार 25 मई 2026 से लागू हो गई हैं। पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। सप्ताह भर के भीतर यह चौथी बार बढ़ोत्तरी की गयी है। तेल कंपनियों की इस मनमानी और केन्द्र सरकार के मौन रहने को लेकर लोगों में भीतर ही भीतर गुस्सा भड़क रहा है। यह कभी भी ज्वालामुखी बनकर भड़क सकता है जिसका खामियाजा मोदी सरकार को भुगतना पड़ सकता है।
ईंधन कीमतों में इस बढ़ोतरी के बाद आम आदमी की चिंता और बढ़ गई है। पहले से ही खाद्य पदार्थों, घरेलू सामान और परिवहन खर्च में लगातार बढ़ोतरी से लोग परेशान हैं। अब पेट्रोल-डीजल महंगा होने से रोजमर्रा की जरूरतों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खासतौर पर नौकरीपेशा, मध्यमवर्गीय परिवार और छोटे व्यवसायियों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
राजधानी दिल्ली समेत देश के कई बड़े शहरों में नई कीमतें लागू होने के बाद वाहन चालकों को अब पेट्रोल और डीजल के लिए पहले से ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे। परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी, जिसका असर फल-सब्जियों, खाद्यान्न और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। इससे महंगाई और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही नई दरों को लेकर चर्चा होती रही। कई वाहन चालकों ने बढ़ी कीमतों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। लोगों का कहना है कि रोजाना काम पर आने-जाने में होने वाला खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं, टैक्सी और ऑटो चालकों ने भी चिंता जताई कि बढ़ती कीमतों के कारण उनका मुनाफा घटता जा रहा है।
सत्ता पक्ष के लोगों का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक परिस्थितियों का असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है। पर आम उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें राहत देने के लिए सरकार और तेल कंपनियों को ठोस कदम उठाने चाहिए। कई लोगों ने ईंधन पर लगने वाले टैक्स में कटौती की मांग भी उठाई है।
पिछले कुछ समय से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर दाम तय करती हैं। ऐसे में वैश्विक बाजार में किसी भी बदलाव का असर सीधे देश के उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
ईंधन कीमतों में ताजा बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब गर्मी के मौसम में लोगों का बिजली और परिवहन खर्च पहले से ही बढ़ा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो पेट्रोल-डीजल के दामों में आगे भी वृद्धि हो सकती है।
