बच्चों और किशोरों में बढ़ रही मानसिक स्वास्थ्य समस्या पर एमिटी यूनिवर्सिटी में हुआ मंथन

  • एमिटी यूनिवर्सिटी छत्तीसगढ़ में बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

रायपुर, 7 मई 2026। एमिटी इंस्टीट्यूट आफ बिहेवियरल एंड एलाइड साइंसेज, अमिटी यूनिवर्सिटी छत्तीसगढ़ द्वारा 5 एवं 6 मई 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में बाल और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों और नीति-निर्माताओं ने भाग लेते हुए बच्चों एवं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से 130 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विभिन्न तकनीकी सत्रों में 60 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जो बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती अकादमिक और क्लिनिकल रुचि को दर्शाते हैं। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण एब्स्ट्रैक्ट बुक का औपचारिक विमोचन रहा।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि डॉ. सुरभि दुबे, एसोसिएट प्रोफेसर, मनोचिकित्सा विभाग, पं.जे.एन.एम. मेडिकल कॉलेज, रायपुर ने बच्चों और किशोरों में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रारंभिक पहचान और समयबद्ध हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अपने संबोधन में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े बढ़ते मामलों के आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए अवसंरचना सुदृढ़ीकरण, कलंक-निवारण तथा साक्ष्य-आधारित बहु-क्षेत्रीय रणनीतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई।

सार्थक शोध करने की जरुरत

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) पीयूष कांत पांडे ने युवाओं में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए अंतर्विषयक एवं साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय पौराणिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए प्रह्लाद को मानसिक दृढ़ता तथा अभिमन्यु को अधूरी शिक्षा के दुष्परिणामों का प्रतीक बताया। उन्होंने अकादमिक जगत, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं के बीच समन्वित सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए युवा शोधार्थियों को नीति-निर्माण एवं व्यावहारिक हस्तक्षेपों हेतु सार्थक शोध करने के लिए प्रेरित किया।

भ्रांतियों को दूर करने की जरुरत

विशिष्ट अतिथि डॉ. सुप्रीति शर्मा, हेड, एनेस्थीसिया एवं पेन मैनेजमेंट, श्री मेडिशाइन हॉस्पिटल, रायपुर ने चिकित्सा उपचार, विशेषकर सर्जरी और क्रिटिकल केयर के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने मरीजों और देखभालकर्ताओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहयोग को चिकित्सा प्रणाली में शामिल करने तथा चिकित्सा प्रक्रियाओं से जुड़े मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता बताई।

प्रो-वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) सुमिता दवे ने तेजी से विकसित हो रहे सामाजिक-डिजिटल परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने भावनात्मक सशक्तिकरण और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सम्मेलन के आयोजन की सराहना की।

संतुलित डिजिटल सहभागिता की जरुरत

सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के व्याख्यान भी आयोजित किए गए। जगन्नाथ यूनिवर्सिटी, बांग्लादेश के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. असोक कुमार साहा ने प्रौद्योगिकी और मानव जीवन विषय पर व्याख्यान देते हुए तकनीकी विकास और मानव व्यवहार के बदलते संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने तकनीक के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों का उल्लेख करते हुए संतुलित डिजिटल सहभागिता की आवश्यकता बताई।

क्वींस कॉलेज एवं ग्रेजुएट सेंटर, सिटी यूनिवर्सिटी आॅफ न्यूयॉर्क के प्रोफेसर डॉ. मर्फी हैलिबर्टन तथा स्टोनहिल कॉलेज, अमेरिका की डॉ. वणिर्का अरोड़ा ने संयुक्त रूप से अनुरूपता पर आधारित देखभाल: मध्य भारत में युवा आत्महत्या व्यवहार के बाद मनोसामाजिक देखभाल विषय पर संबोधित किया।

विभाग की हेड आॅफ इंस्टीट्यूशन प्रो. (डॉ.) प्रमिला सिंह ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए सम्मेलन की थीम पर प्रकाश डाला तथा वर्तमान समय में बच्चों एवं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।

समापन सत्र की मुख्य अतिथि यूनिसेफ छत्तीसगढ़ की चाइल्ड प्रोटेक्शन स्पेशलिस्ट सुश्री चेतना देसाई रहीं। उन्होंने आओ बात करें जैसे सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों तथा जलवायु परिवर्तन के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने मनोसामाजिक सहयोग, पॉक्सो एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन और बाल संरक्षण के व्यावहारिक उपायों पर विशेष बल दिया।

सम्मेलन का समापन डॉ. महेंद्र कुमार, संयोजक द्वारा सम्मेलन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के साथ हुआ, जिसके पश्चात सह-संयोजक डॉ. अनीता गुप्ता ने औपचारिक आभार प्रदर्शन किया।