महिला सुरक्षा के बगैर आज़ादी के मायने अधूरे: सीमा समृद्धि


प्रतापगढ़, 25 जुलाई 2026। यूपी के जनपद प्रतापगढ़ की ऐतिहासिक धरती पर एक अभूतपूर्व वैचारिक और सांस्कृतिक समागम मौर्य बन्धुत्व क्लब भारत (महिला परिषद) के तत्वाधान में दो दिवसीय ‘नारी अस्मिता महाशिखर 2026’ (नमस्ते प्रतापगढ़) का भव्य व सन्देशपरक आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में देश भर से शिक्षा, न्याय, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र की दिग्गज महिला हस्तियां एकमंच पर महिलाओं की प्रज्ञा, संवैधानिक चेतना, विरासत, विज्ञान और सामाजिक समानता के मुद्दों पर एक नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्धता के साथ विमर्श किया।

कार्यक्रम का बुद्धारम्भ दीप प्रज्वलन विधायक सदर राजेंद्र मौर्य व राकेश कनौजिया द्वारा बुद्ध वंदना से किया गया। दो दिवसीय इस महाशिखर सम्मेलन में देश-प्रदेश से पधारी विदुषी महिलाओं ने कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए हैं।

महाराष्ट्र से पधारी मुख्य अथिति प्रख्यात शिक्षाविद एवं समाजसेवी, प्रो. डॉ.कविता म्हात्रे व उनकी जीत फाउंडेशन टीम द्वारा “माता सावित्रीबाई फुले” के जीवन पर प्रेरणादाई नाट्य मंचन ने सभी को प्रभावित किया। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता व निर्भया कांड को न्याय दिलाने वाली एडवोकेट सीमा समृद्धि ने विमर्श को आगे बढ़ाते हुये कहा कि महिलाओं को कानून और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के प्रति सचेत होना होगा। जब तक देश की आखिरी कतार में खड़ी महिला को न्याय और सुरक्षा का अहसास नहीं होगा, तब तक आज़ादी के मायने अधूरे हैं। यह मंच संवैधानिक चेतना जगाने का काम करेगा।

नारी अस्मिता पर अपनी विमर्श को साझा करते हुए समाजसेवी संघमित्रा गौतम ने कहा कि नारी अस्मिता केवल एक शब्द नहीं, बल्कि हमारे समाज के अस्तित्व की नींव है। आयोजकों का यह प्रयास महिलाओं को अपनी शक्ति पहचानने और समाज निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगा।

महिलाओं को राजनीति में उनकी भूमिका पर अपनी बात रखते हुएअध्यक्ष, जिला पंचायत,रायबरेली रंजना चौधरी ने महिलाओं का आवाहन करते हुए कहा कि राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी से ही नीतियों में संवेदनशीलता आ सकती है। प्रतापगढ़ का यह महाशिखर ग्रामीण और शहरी नेतृत्व को एक मजबूत साझा मंच प्रदान करेगा।

समाज में रूढ़िवादिता पर प्रहार करते हुए युवा समाजसेविका प्रियंका शाक्य ने कहा कि आज की युवा नारी रूढ़ियों को तोड़कर विज्ञान और प्रगति की राह पर बढ़ रही है। इस आयोजन के माध्यम से हम युवाओं में तार्किक सोच और सामाजिक समानता की भावना का संचार करेंगे।

लेखन व साहित्य पर अपने विचार रखते हुए प्रसिद्ध कवयित्री एवं लेखिका वंदना सिद्धार्थ ने कहा साहित्य समाज का दर्पण होता है। मैं अपनी कविताओं और लेखन के माध्यम से महिलाओं के भीतर छिपे स्वाभिमान की आग को इस मंच से स्वर दूँगी, ताकि वे अपनी अस्मिता के लिए लड़ सकें।

गीत से अपनी पहचान बना चुकी अंतरराष्ट्रीय धम्म गायिका शिल्पी शाक्य आध्यात्मिक गीतों को प्रस्तुत करते हुए महिलाओं का आवाहन किया कि संगीत और सांस्कृतिक विरासत के बिना कोई भी आंदोलन अधूरा है। मैं अपने गीतों के जरिए महापुरुषों के संदेश और सामाजिक समानता की गूंज को प्रतापगढ़ की फिजाओं में बिखेरने के लिए उत्सुक हूं।

साहित्यकार एवं लेखिका आराधना पी मौर्य द्वारा अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह महाशिखर राष्ट्र की वैचारिक पुनर्संरचना हेतु एक मील का पत्थर साबित होगा। हमारी कलम और हमारे विचार महिलाओं के गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने का काम करेंगे।
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संचालन अंजू मौर्य,मीनू रानी व मंजू मौर्य ने संयुक्त रूप से किया। बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता के प्रति हेमा मौर्य व प्रियंका कुशवाहा आभार संयुक्त रूप से प्रकट किया गया। इस अवसर पर सुषमा मौर्य,समन्वय परिवार संरक्षिका लीलावती सरोज, फूल कली, रन्नु कनौजिया, रामलली मौर्य, सुमन मौर्य, सुनीता मौर्य, डॉ राजीव रत्न मौर्य, भारत बौद्ध, संगीता कनौजिया, नीरज यादव, अनिका यादव अंजनी अवधेश, शर्मिला राहुल, कल्पना कनौजिया, ललिता, अजय मौर्य, अनीता मौर्य, सुनील मौर्य, अनिल मौर्य, अजीत मौर्य, संगीता सरोज, रंजू बौद्ध, इं. राम अचल मौर्य, रमा शंकर मौर्य, राम सजीवन मौर्य “बब्बू”, आशीष मौर्य पिंटू, राम मनोहर मौर्य, राजकुमारी, सावित्री मौर्य आदि उपस्थित रहे।