नई दिल्ली, 13 जुलाई 2026। तमिल साहित्यकार एवं गीतकार आर वैरमुत्तु को देश के सबसे बड़े साहित्यिक पुरस्कार ज्ञानपीठ से सोमवार को सम्मानित किया गया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्ण सिंह ने यहां चिन्मय सभागार में उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया। पुरस्कार स्वरूप उन्हें 11 लाख रुपए की सम्मान राशि, वाग्देवी की एक कांस्य प्रतिमा तथा प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया।
श्री वैरमुत्तु भारत के प्रख्यात तमिल कवि, गीतकार, उपन्यासकार और साहित्यकार हैं। उनका जन्म 13 जुलाई 1953 को तमिलनाडु के थेनी ज़िले में हुआ। उन्होंने चेन्नई के पच्चैयप्पा कॉलेज से तमिल साहित्य में स्नातकोत्तर किया और अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत कवि के रूप में की। वर्ष 1980 में फिल्म निझलगल के माध्यम से उन्होंने तमिल सिनेमा में गीतकार के रूप में पदार्पण किया।
श्री वैरमुत्तु यह पुरस्कार पाने वाले पहले तमिल कवि हैं, जबकि इससे पहले पी. वी. अकिलंदम तथा दण्डपाणि जयकान्तन सहित दो तमिल लेखकों को यह पुरस्कार मिल चुका है।
चार दशकों से अधिक के अपने करियर में श्री वैरमुत्तु ने तमिल फिल्मों के लिए 7,500 से अधिक गीत लिखे हैं। साथ ही उनके कई कविता-संग्रह तथा उपन्यास भी प्रकाशित हुए हैं। उनकी रचनाओं के लिए उन्हें सात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ गीतकार), साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्मश्री और पद्म भूषण सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं।
तमिल भाषा और साहित्य को समृद्ध बनाने में योगदान के कारण श्री वैरमुत्तु को समकालीन भारतीय साहित्य के सबसे प्रभावशाली रचनाकारों में गिना जाता है। ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ ट्रस्ट द्वारा प्रदान किया जाता है।
