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प्रतापगढ़ से कांवड़ लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचे मदन सिंह

प्रतापगढ़, 1 अगस्त 2026। सावन महीने में बाबा बैद्यनाथ के जयकारे के साथ बिहार-झारखंड की सीमा पर स्थित सुल्तानगंज से कांवड़ियों का जत्था लगातार बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर की ओर बढ़ रहा है। इसी कड़ी में इस वर्ष भी यूपी के प्रतापगढ़ जिले के बड़का तुलापुर गांव से श्रद्धालुओं का एक दल पवित्र जल लेकर बाबा के दरबार पहुंचा और जलाभिषेक कर मनोकामनाएं मांगीं।

बड़का तुलापुर निवासी भगवानदीन के पुत्र चंद्रपाल के नाती और बड़े मुंशी के बड़े पुत्र मदन सिंह अपने मित्रों के साथ सुल्तानगंज से कांवड़ उठाकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचे। उन्होंने पैदल यात्रा कर बाबा पर जल अर्पित किया। यात्रा के दौरान उनके साथ खरगपुर निवासी और मुंबई में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर सिंह मुंशी के मित्र विक्रम सिंह सहित आसपास के कई ग्राम सभाओं के लोग भी शामिल रहे। सभी ने मिलकर बाबा मंदिर में विधिपूर्वक जलाभिषेक किया और देश-दुनिया की सुख-समृद्धि की कामना की।

यात्रा के दौरान भक्तिमय माहौल देखने को मिला। कांवड़ियों ने “बोल बम” के नारों के साथ करीब 100 किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा पूरी की। रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए सेवा शिविर लगाए गए थे, जहां भोजन और विश्राम की व्यवस्था की गई थी। मदन सिंह ने बताया कि यह आस्था की यात्रा है और हर साल बाबा का आशीर्वाद लेने के लिए वे अपने दोस्तों के साथ यहां आते हैं।

इस बार की यात्रा को खास बनाने वाली बात यह रही कि आदित्य पांडे, जो एबीपी के अध्यक्ष और भट्ठा व्यवसायी हैं, उन्होंने भी अपने परिवार की ओर से बाबा बैद्यनाथ धाम में प्रार्थना करवाई। आदित्य पांडे अपने बड़े मुंशी, छोटे मुंशी और अन्य कर्मचारियों के साथ मंदिर पहुंचे। व्यस्तता के कारण स्वयं उपस्थित न हो पाने पर उन्होंने मदन सिंह के माध्यम से बाबा के दरबार में परिवार सहित पूजा-अर्चना करवाई और सुख-शांति की प्रार्थना की।

सुल्तानगंज से जल लेकर देवघर तक की कांवड़ यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एकता और समर्पण का भी उदाहरण है। 

बाबा बैद्यनाथ धाम में सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। प्रशासन की ओर से भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं ने बाबा से क्षेत्र में अच्छी बारिश, फसल और सभी के कुशल मंगल की प्रार्थना की।

प्रतापगढ़ से लेकर मुंबई तक के लोगों की आस्था एक बार फिर बाबा बैद्यनाथ के दरबार में देखने को मिली, जहां भक्ति, परंपरा और सामाजिक सौहार्द का संगम हुआ।