छत्तीसगढ़

परमार्थ की प्राप्ति के लिए जिज्ञासा सबसे आवश्यक

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On अगस्त 4, 2026
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रायपुर, 4 अगस्त 2026 । विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में चल रहे सर्वमंगलमय वर्षावास-2026 में सोमवार को परम पूज्य मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. ने जैन आचार्य वीरभद्र गणि रचित ‘आतुर प्रत्याख्यान’ ग्रंथ का वाचन प्रारंभ किया। उन्होंने कहा कि परमार्थ की प्राप्ति के लिए जिज्ञासा सबसे आवश्यक है। यदि ग्रंथ को समझने की जिज्ञासा नहीं होगी तो आत्मकल्याण का मार्ग भी प्रशस्त नहीं होगा।

धर्मसभा में मुनिश्री ने बताया कि ‘आतुर’ का अर्थ अत्यधिक बीमार या मरणासन्न व्यक्ति से है, जबकि ‘प्रत्याख्यान’ का अर्थ जीवन के अंतिम समय में पाप कर्मों और कषायों का त्याग कर आत्मा को शुद्ध करने की प्रक्रिया है। यह ग्रंथ बताता है कि अंतिम समय में व्यक्ति मोह और व्याकुलता छोड़कर आहार एवं कषायों का क्रमिक त्याग करते हुए आत्मचिंतन में कैसे लीन हो सकता है। साथ ही जीवनभर के पापों का प्रायश्चित कर सम्यक्त्व को स्थिर रखने का मार्ग भी बताता है।

मुनिश्री ने कहा कि यह ग्रंथ मृत्यु को भय नहीं, बल्कि महोत्सव के रूप में स्वीकार करना सिखाता है। जन्म के समय व्यक्ति स्वयं रोता है और मृत्यु के समय दूसरों को रुलाकर जाता है, लेकिन जैन दर्शन मृत्यु को भी मंगलमय बनाने की प्रेरणा देता है। मुनिश्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का लक्ष्य समाधि मरण होना चाहिए, लेकिन इसके लिए जीवनभर पुरुषार्थ करना आवश्यक है। जो व्यक्ति मृत्यु को मंगलमय बनाता है, उसका परलोक भी मंगलमय हो जाता है।

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुणीया व महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि सर्वमंगलमय वर्षावास में आत्मकल्याण के लिए तप का क्रम जारी है। सोमवार को आरवी झाबक का 7 एवं पूजा सुराना का 7 उपवास रहा। धर्मसभा में सभी ने दोनों तपस्वियों की खूब-खूब अनुमोदना की। दोनों तपस्वियों ने एक- दूसरे का सम्मान किया। इसी कड़ी में 49 दिवसीय पंच परमेष्ठी श्रेणी तप की शुरुआत 2 अगस्त से हुई। आज तपस्वियों का व्यासना था। वही 7 अगस्त से 28 अगस्त तक श्री गिरनार नेमी तप प्रारंभ होगा। आयम्बिल का क्रम जारी है।

Ramesh Pandey

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रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।