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अमेरिका की संघीय अदालत ने गौतम अडानी को दी बड़ी राहत

नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026। भारत के मशहूर उद्यमी गौतम अडानी के लिए बड़ी खुशखबरी आयी है। अमेरिका में उनके खिलाफ चल रहे मामले में कोर्ट से उन्हें कानूनी राहत मिल गयी है। गौतम अडानी के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों को अमेरिका की संघीय अदालत ने आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है। पूर्व में अमेरिकी न्याय विभाग ने भी इस मामले को वापस लेने और आगे न बढ़ाने का फैसला लिया था। अब कोर्ट ने इस फैसले को मंजूरी दे दी है।

न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गारॉफिस ने सोमवार 10 अगस्त 2026 को सरकारी वकीलों की केस खारिज करने की मांग वाली इस याचिका को मंजूरी दे दी। इससे पहले जज ने न्याय विभाग से मामले को खत्म करने के फैसले पर सफाई मांगी। कोर्ट ने अडानी से यह भी पूछा था कि क्या केस वापस लेने के बदले किसी तरह का समझौता किया गया है।

अमेरिकी न्याय विभाग ने मई में ही इस बात का संकेत दे दिया था कि वह केस आगे नहीं बढ़ाएगा। 4 जुलाई को कोर्ट में दाखिल एक दस्तावेज में वरिष्ठ अधिकारी ट्रेंट मैककॉटर ने इसके पीछे कई प्रमुख वजहें बताईं। कोर्ट को बताया गया कि मामला मुख्य रूप से विदेशी गतिविधियों से जुड़ा है इसे साबित करना बेहद मुश्किल है। न्याय विभाग ने यह भी कहा कि वे इस मामले में अपनेऔर संसाधन और बर्बाद नहीं करना चाहते।

क्या थे अडानी पर आरोप

  • अमेरिकी वकीलों ने 2024 में अडानी के खिलाफ आरोप तय किए थे।
  • उन पर आरोप था कि उन्होंने भारत में सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने पर सहमति जताई थी, ताकि अडानी समूह की एक कंपनी को बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट की मंजूरी मिल सके।
  • वकीलों ने अडानी और अन्य आरोपियों पर अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया था।
  • आरोप था कि कंपनियों की भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों को लेकर निवेशकों को गलत जानकारी दी गई।

अडानी ग्रुप ने आरोपों को कहा था झूठा

यह मामला अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और भारत सरकार को 12 गीगावाट तक सौर ऊर्जा बेचने की योजना से जुड़ा था। हालांकि अडानी ग्रुप ने शुरुआत से ही इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद, झूठा और मनगढ़ंत बताकर खारिज किया था।

शुरुआत में जज निकोलस गारॉफिस ने केस वापस लेने के न्याय विभाग के रुख पर सवाल उठाए थे और पूछा था कि क्या अडानी ग्रुप और सरकार के बीच कोई लेन-देन या गुप्त समझौता हुआ है? इस पर गौतम अडानी के वकील ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि अडानी ग्रुप के अमेरिका में प्रस्तावित निवेश का इस केस को वापस लेने से कोई संबंध नहीं है। न्याय विभाग ने भी साफ किया कि निवेश की बात इस फैसले का हिस्सा नहीं थी। इन आश्वसनों के बाद कोर्ट ने केस को अंतिम रूप से खारिज कर दिया।