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उत्तराखंड की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी टीईटी को लेकर शिक्षकों को मिले राहत : गोपी वर्मा

रायपुर, 13 अगस्त 2026। शिक्षकों की पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच उत्तराखंड में सामने आए हालिया घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के बीच भी नई उम्मीद जगा दी है। शिक्षकों का कहना है कि जिस तरह उत्तराखंड में निर्धारित समय-सीमा के भीतर टीईटी पूरा करने का अवसर देते हुए पदोन्नति का रास्ता निकालने पर सहमति बनी है, उसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी व्यावहारिक और न्यायसंगत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

शिक्षकों का तर्क है कि यदि शासन की ओर से टीईटी की योग्यता पूरी करने के लिए निश्चित समय-सीमा निर्धारित की जाती है, तो उस अवधि के दौरान पात्र शिक्षकों की पदोन्नति को केवल टीईटी के आधार पर रोकना उचित नहीं होगा। ऐसे में “पहले पदोन्नति, निर्धारित अवधि में टीईटी पूर्ण करने का अवसर” जैसी व्यवस्था छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षकों के लिए राहत का रास्ता खोल सकती है।

उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में 11 अगस्त 2026 को हुई बैठक में शिक्षकों की पदोन्नति और टीईटी की अनिवार्यता से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। सामने आए प्रस्ताव के अनुसार शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी की योग्यता पूरी करने का अवसर देने और इस अवधि के दौरान पदोन्नति की प्रक्रिया को केवल टीईटी के अभाव में बाधित नहीं करने की बात सामने आई है।

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि शिक्षकों को अपनी टीईटी योग्यता पूरी करने के लिए पर्याप्त समय देने की दिशा में विचार किया गया है। निर्धारित समय-सीमा तक योग्यता पूरी नहीं करने पर पदोन्नति पर आगे आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

यही व्यवस्था अब छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए भी उम्मीद की किरण बन गई है।

छत्तीसगढ़ में भी टीईटी और पदोन्नति को लेकर लंबे समय से शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के शिक्षकों की पदोन्नति में टीईटी की अनिवार्यता को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा और मांग सामने आती रही है।

शिक्षकों का कहना है कि टीईटी शिक्षक की योग्यता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण व्यवस्था है, लेकिन इसके लिए निर्धारित समय और अवसर भी मिलना चाहिए। यदि किसी शिक्षक को टीईटी परीक्षा में शामिल होकर निर्धारित अवधि में पात्रता प्राप्त करने का अवसर दिया जाता है, तो पदोन्नति को पूरी तरह रोकने के बजाय सशर्त पदोन्नति का विकल्प अपनाया जा सकता है।

इससे एक ओर शिक्षकों को न्याय मिलेगा, वहीं दूसरी ओर शासन की टीईटी संबंधी व्यवस्था भी प्रभावी रूप से लागू हो सकेगी।

शिक्षक संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि इस मांग को केवल “बिना टीईटी प्रमोशन” के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वास्तविक मांग यह है कि टीईटी की निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने से पहले शिक्षक को पदोन्नति के अवसर से वंचित न किया जाए।

प्रस्तावित व्यवस्था में शिक्षक को पदोन्नति का अवसर दिया जा सकता है और साथ ही यह स्पष्ट शर्त रखी जा सकती है कि उसे शासन द्वारा निर्धारित अंतिम तिथि के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। यदि शिक्षक निर्धारित अवधि में टीईटी की पात्रता हासिल नहीं करता है, तो शासन के नियमों के अनुसार उसकी पदोन्नति पर आवश्यक निर्णय लिया जा सकता है।

इससे शिक्षकों और शासन दोनों के हितों के बीच संतुलन कायम किया जा सकता है।

उत्तराखंड में सामने आए घटनाक्रम के बाद अब छत्तीसगढ़ के शिक्षक संगठनों की ओर से भी राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग के समक्ष इस विषय को मजबूती से उठाए जाने की संभावना है।

शिक्षकों की मांग है कि छत्तीसगढ़ शासन टीईटी और पदोन्नति के संबंध में स्पष्ट नीति बनाए तथा ऐसी व्यवस्था करे जिसमें पात्र शिक्षकों की पदोन्नति केवल टीईटी की तत्काल उपलब्धता के कारण बाधित न हो। साथ ही शिक्षकों को एक निश्चित और पर्याप्त समय-सीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करने का अवसर दिया जाए।

शिक्षकों का मानना है कि इससे वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को राहत मिलेगी और पदोन्नति की लंबित प्रक्रिया को भी गति मिल सकेगी।

यदि छत्तीसगढ़ में भी उत्तराखंड की तर्ज पर समयबद्ध टीईटी अवसर के साथ पदोन्नति की व्यवस्था लागू की जाती है, तो इससे बड़ी संख्या में शिक्षकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

यह व्यवस्था शिक्षकों के लिए राहत देने के साथ-साथ शिक्षा विभाग के लिए भी व्यावहारिक समाधान साबित हो सकती है। इससे पदोन्नति के रिक्त पदों को समय पर भरा जा सकेगा और शिक्षकों को अपनी टीईटी योग्यता पूर्ण करने के लिए आवश्यक अवसर भी मिलेगा।

उत्तराखंड की पहल को छत्तीसगढ़ में सीधे लागू करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है, लेकिन वहां सामने आए मॉडल से छत्तीसगढ़ के लिए एक वैकल्पिक रास्ता जरूर दिखाई देता है।

अब शिक्षक संगठनों और शिक्षकों की उम्मीद छत्तीसगढ़ शासन की ओर है कि टीईटी की अनिवार्यता को बनाए रखते हुए भी शिक्षकों को निर्धारित समय-सीमा तक टीईटी पूर्ण करने का अवसर दिया जाए और इस अवधि में उनकी पदोन्नति का रास्ता बंद न किया जाए।

टीईटी भी जरूरी, शिक्षकों का प्रमोशन भी जरूरी है। समयबद्ध अवसर के साथ दोनों का संतुलन ही छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के हित में बेहतर समाधान हो सकता है।