वाराणसी, 17 अक्टूबर 2026। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर गौ रक्षा के लिए आंदोलन पर उतरने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वह कार्तिक मास में गौ रक्षा के लिए आंदोलन शुरू करेंगे। यह ऐलान उन्होंने काशी स्थित श्री विद्या मठ में गंगा के पावन तट पर संतों का समागम में किया। उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 1008 के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संतों, धर्माचार्यों, विद्वानों और भक्तों ने भाग लिया। इस दौरान गौ रक्षा, गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने और सनातन धर्म से जुड़े विषयों पर विचार रखे गए। शंकराचार्य ने कार्तिक मास में गौ रक्षा के लिए फिर से जनआंदोलन खड़ा करने का प्रयास करने की घोषणा की।
धर्माचार्य ने किया सम्मानित
गंगा दर्शन के बाद जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी योगेश्वराचार्य, स्वामी अवधेशानंद महाराज, स्वामी सारंगधराचार्य और वैष्णव आश्रम मुंबई के स्वामी चंद्रप्रकाशाचार्य सहित कई संत एवं धर्माचार्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास, पंडित दिनेश शर्मा और अन्य श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अंगवस्त्र, भगवान श्री जगन्नाथ जी का महाप्रसाद और डॉ. अंकिता द्वारा रचित पुस्तक सनातन शाश्वत भेंट कर सम्मानित किया।
इसके बाद मठ में उपस्थित बटुकों, विद्वानों और संतों को भी अंगवस्त्र एवं भगवान श्री जगन्नाथ जी का महाप्रसाद प्रदान किया गया।
गौ रक्षा के लिए शंकराचार्य के संघर्ष की सराहना
धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने शंकराचार्य के गौ रक्षा अभियान की सराहना करते हुए कहा कि धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी और पूर्व पीठाधीश्वरों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ माता की रक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में अभियान चलाया।
उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में गौ रक्षा के उद्देश्य से यात्रा करना उनके संकल्प और संघर्ष को दर्शाता है। उनके अनुसार, गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग के लिए उठाया गया यह कदम आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
गौ रक्षा के लिए जो बलिदान देना पड़े, तैयार हूं: शंकराचार्य
समागम में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने आशीर्वचन में कहा कि धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी और उनके पूज्य गुरुदेव द्वारा शुरू किए गए कार्यों को आगे बढ़ाना सनातन धर्म और भारत राष्ट्र के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, हमें किसी पार्टी से विरोध नहीं है। सभी पार्टियों की नीतियां अच्छी होती हैं, लेकिन उनकी नीयत में फर्क होता है। इसलिए कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए।
शंकराचार्य ने गौ रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि गौ माता की रक्षा के लिए उन्हें चाहे जो बलिदान देना पड़े, वह इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने अपने गुरुदेव के सपनों को साकार करना अपना प्रथम कर्तव्य बताया। साथ ही कहा कि कार्तिक मास में गौ रक्षा के लिए पुनः जनआंदोलन खड़ा करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने गंगा, गीता, गायत्री और गौ माता की कृपा से आंदोलन की सफलता का विश्वास जताया।
गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने का उठा मुद्दा
जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी योगेश्वराचार्य ने मंदिरों में कथित अनियमितताओं, चंदे के दुरुपयोग और संतों के सम्मान से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर माघ मेले में संत समाज के सामने विस्तार से चर्चा की जाएगी।
उन्होंने गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
समागम में साध्वी पूर्णिमा दीदी, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, देवेंद्र पांडे ‘गोप’, शैलेंद्र सिंह योगी और राजा सक्षम सिंह सहित अनेक श्रद्धालु एवं बटुक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गौ रक्षा और सनातन धर्म से जुड़े विषय प्रमुखता से चर्चा के केंद्र में रहे।
