प्रतापगढ़, 21 सितंबर 2026। कोठियाही दिलीपपुर में पंडित बंशीधर दुबे के यहां करपात्री जी के शिष्य धर्म धुरंधर कथा वाचक परम पूज्य स्वामी ओमानंद जी महाराज के श्री मुख से अमृत रस की वर्षा हो रही है। शिव पुराण कथा श्रवण कराई जा रही है। शिव तत्व का वर्णन करते हुए स्वामी ओमानंद ने बताया कि जिस प्रकार आकाश हर जगह फैला हुआ है और सब कुछ उसी के भीतर समाहित है। उसी प्रकार शिव तत्व भी संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है।
यह तत्व माया राग द्वेष और सुख-दुख के द्वंद्वो से पूरी तरह से मुक्त है। यह मन और बुद्धि की समझ से परे है। विशुद्ध आनंद और शांति की वह अवस्था है जिसका अनुभव केवल गहन ध्यान में होता है। पृथ्वी से लेकर तमाम तत्वों के अंत में जो परम तत्व बचता है वह शिव तत्व ही है।
राम चरित मानस की रचना सर्व प्रथम भगवान आशुतोष ने किया। रचि महेश निज मानस राखा, पाई सुसमय शिवा सन भाखा। भगवान श्री कृष्ण गीता में अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं। हे अर्जुन वैष्णवों में मैं शंभू हूं। इसी प्रकार भगवान राम कहते हैं शिव द्रोही मम दास कहावा सो नर मोहिं सपनेउ नहीं भावा। धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी हरि और हर के समन्वय थे।
धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडेय अनिरुद्ध रामानुज दास ने स्वामी ओमानंद को अंगवस्त्रम, रामानुज पञ्चाङ्गम और भगवान श्री जगन्नाथ जी का महाप्रसाद एवं डा अंकिता पांडेय द्वारा रचित सनातन शाश्वत नामक पुस्तक समर्पित करके सम्मानित किया गया। व्यास पीठ द्वारा धर्माचार्य को भी अंगवस्त्रम एवं माल्यार्पण करके सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर पं दिनेश शर्मा प्रतिनिधि डा महेंद्र सिंह एमएलसी पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश, अनिल कुमार त्रिपाठी प्रबंधक डॉल्फिन, आशुतोष पांडेय जिला उपाध्यक्ष समाजवादी पार्टी, रिंकू सिंह प्रधान, आशु प्रधान, दीपू, महावीर तिवारी, प्रणव कुमार दुबे, विपिन कुमार दुबे, दीपक कुमार सहित अनेकों भक्त महिला पुरुष उपस्थित रहे।
