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महादेव सट्टा ऐप का प्रमोटर सौरभ चंद्राकर भारत लाया गया, रायपुर की कोर्ट में होगी पेशी

Ramesh Pandey
By Ramesh Pandey On नवम्बर 1, 2026
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महादेव सट्टा ऐप का प्रमोटर सौरभ चंद्राकर भारत लाया गया

नई दिल्ली, 1 नवंबर 2026। देश के चर्चित स्कैम महादेव सट्टा ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को सीबीआई भारत लेकर आ गयी है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी सौरभ चंद्राकर ने दुबई में बैठकर यह स्कैम चलाया था। बाद में सौरभ चन्द्राकर ने ओमान की नागरिकता ले ली थी। इस मामले में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सीबीआई से सौरभ चंद्राकर के भारत लाये जाने की अपील की थी।

सीबीआई की विशेष टीम सौरभ चंद्राकर को लेकर नई दिल्ली 1 नवंबर 2026 को आ गयी है। अब उसे छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर लाया जाएगा। इसके बाद उसे यहां सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। सीबीआई के दो मामलों में उसके खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक मामले में भी वह वांछित चल रहा है। सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी को विदेशों में रहकर भारतीय नागरिकों के खिलाफ कथित आर्थिक अपराधों का नेटवर्क संचालित करने वाले आरोपियों के विरुद्ध जांच एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। इस प्रत्यर्पण में सीबीआई, ईडी, इंटरपोल और ओमान की संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहा।

रेड कॉर्नर नोटिस से ओमान तक पहुंची जांच

  • सीबीआई के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था।
  • इसी के आधार पर उसका पता लगाया गया और ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे हिरासत में लिया।
  • इसके बाद सीबीआई और ईडी ने भारत सरकार के माध्यम से ओमान के सुल्तान के समक्ष प्रत्यर्पण के औपचारिक अनुरोध प्रस्तुत किए।
  • आरोपी के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्य भी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए।
  • भारत सरकार की एजेंसियों और इंटरपोल के समन्वित प्रयासों के बाद प्रत्यर्पण की मंजूरी मिली।
  • इसके बाद सीबीआई की विशेष टीम मस्कट पहुंची और सौरभ चंद्राकर को भारत लेकर आई।
  • सीबीआई ने इस कार्रवाई में सहयोग के लिए ओमान के सुल्तान, सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया है।

छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने संभाली थी जांच

महादेव आनलाइन बुक से जुड़े मामलों की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली थी। जांच में सामने आया कि महादेव आनलाइन बुक देश के बड़े अवैध आनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्कों में शामिल था और इसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और अन्य खेलों एवं आयोजनों पर आनलाइन सट्टेबाजी कराई जाती थी। इसके लिए फ्रेंचाइजी आधारित पैनल और शाखाओं का व्यापक ढांचा तैयार किया गया था। इस व्यवस्था के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों को सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था और उनसे रकम जुटाई जाती थी।

बैंक खातों से हवाला तक फैला था पैसे का नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार, सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को दूसरे लोगों के नाम पर इस्तेमाल किए जा रहे अनेक बैंक खातों के जरिए स्थानांतरित किया जाता था। इन खातों में कई स्तरों पर लेनदेन के बाद हवाला के माध्यम से रकम विदेश भेजी जाती थी। जांच में सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर संरक्षण देने के लिए धन इस्तेमाल किए जाने के आरोप भी सामने आए। एजेंसियों का मानना है कि इस व्यवस्था ने अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क को लंबे समय तक संचालित करने में मदद पहुंचाई। सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के साथ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किए हैं। सौरभ चंद्राकर इन मामलों में नामजद प्रमुख आरोपियों में शामिल है। वहीं, ईडी ने भारत और विदेशों में स्थित उसकी कई संपत्तियां कुर्क की हैं।

मेडिकल जांच के बाद रायपुर लाने की तैयारी

सीबीआई के अनुसार, भारत पहुंचने के बाद सौरभ चंद्राकर की चिकित्सकीय जांच कराई जाएगी। इसके बाद ट्रांजिट रिमांड हासिल कर उसे रायपुर लाया जाएगा। उसे रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाना है। उसकी वापसी के बाद अब जांच का महत्वपूर्ण चरण शुरू होगा। एजेंसियों की निगाहें सट्टेबाजी नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, विदेशों में मौजूद संपर्कों, कथित हवाला कारोबार और संरक्षण देने वाले लोगों से जुड़े पहलुओं पर रहेंगी। इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों और साक्ष्यों की जांच अदालत में होगी।

Ramesh Pandey

Ramesh Pandey

रमेश पांडेय (Ramesh Pandey) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टिंग में 20 वर्षों का अनुभव है।