नई दिल्ली, 1 नवंबर 2026। अखिल विश्व गायत्री परिवार दीप शताब्दी वर्ष मना रहा है। 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में दीप शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शामिल हुए। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र केवल धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मनुष्य के व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाने और उसकी सद्गुणों को जागृत करने का मार्ग है। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र के माध्यम से व्यक्ति में दूरदर्शिता, संयम, साहस, विवेक, बुद्धि, सेवा और पराक्रम जैसे गुणों का विकास हो सकता है।
यह समारोह माता भगवती देवी शर्मा और ‘अखंड ज्योति’ के अवतरण के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके और गायत्री परिवार के दल नायक डॉ. चिन्मय पंड्या सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
तीन महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अवसरों का संगम
अमित शाह ने कहा कि यह दिन श्रद्धा, सेवा और संकल्प का प्रतीक है। इस अवसर पर लोग माता भगवती देवी शर्मा जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, गायत्री परिवार की मूल भावना के अनुरूप सेवा करने और महर्षि अरविंद तथा स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत बनाने के संकल्प के साथ एकत्रित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष अखंड ज्योति के प्रकट होने के 100 वर्ष, परम वंदनीय माता जी के जन्म के 100 वर्ष और पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की साधना के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ये तीनों महत्वपूर्ण अवसर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक यात्रा के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि 100 वर्ष पहले प्रज्वलित हुई अखंड ज्योति आज 100 से अधिक देशों में 15 करोड़ से अधिक परिवारों तक पहुंच चुकी है। माता जी ने स्वयं तप करके दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाने का कार्य किया।
गायत्री मंत्र को बताया व्यक्तित्व परिवर्तन का मार्ग
अमित शाह ने कहा कि उनके अनुभव में गायत्री मंत्र संपूर्ण परिवर्तन का मार्ग है। यह केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के स्तर पर सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराकर व्यक्ति के भीतर मौजूद सद्गुणों को जागृत करने का माध्यम है।
उन्होंने गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों और उनसे जुड़ी 24 शुभ शक्तियों की आध्यात्मिक अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि मंत्र के शुद्ध उच्चारण और गुरु से प्राप्त संस्कार के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक गुणों का विकास कर सकता है।
इन गुणों में दूरदर्शिता, संयम, तप, साहस, विवेक, बुद्धि, रक्षा, उत्पादन, सेवा, ओजस, प्रेम, पराक्रम और धारणा जैसी विशेषताएं शामिल हैं। उनके अनुसार, इन सद्गुणों के विकास से व्यक्ति का जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है।
15 करोड़ परिवारों तक पहुंचा गायत्री मंत्र का संदेश
गृह मंत्री ने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने गायत्री मंत्र को जन-जन तक पहुंचाकर भारतीय आध्यात्मिक चेतना के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने आचार्य को आध्यात्म का डॉक्टर बताते हुए गायत्री मंत्र के शुद्ध उच्चारण और उससे जुड़ी 24 सद्ग्रंथियों की अवधारणा का जिक्र किया।
अमित शाह ने कहा कि गायत्री मंत्र के अभ्यास से कई युवाओं को सकारात्मक सोच, साहस, स्मरण शक्ति, व्याख्या क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता में लाभ महसूस हुआ है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने गायत्री मंत्र का संदेश 15 करोड़ परिवारों तक पहुंचाया है। यह भारतीय आध्यात्मिकता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार ने मंत्र के प्रति श्रद्धा और उसके शुद्ध उच्चारण की परंपरा स्थापित कर आध्यात्मिक चेतना के विस्तार में योगदान दिया है। इस देवसंस्कृति के संदेश को लंबे समय तक आगे बढ़ाने और युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है।
दीप महायज्ञ को बताया त्याग और समर्पण का प्रतीक
अमित शाह ने कहा कि इसी वर्ष जनवरी में हरिद्वार में आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन में गायत्री परिवार के सदस्यों ने अखंड ज्योति के संकल्प के साथ अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। अब इस यात्रा के अगले पड़ाव पर दो महत्वपूर्ण आयोजन हो रहे हैं।
उन्होंने दीप महायज्ञ का उल्लेख करते हुए कहा कि जलने वाला प्रत्येक दीप त्याग, सहयोग और समर्पण का प्रतीक है। यह संकल्प है कि व्यक्ति अपनी सामर्थ्य का उपयोग समाज, अध्यात्म और राष्ट्र के कल्याण के लिए करेगा।
अंत में गृह मंत्री ने कहा कि गायत्री परिवार के माध्यम से जो आंदोलन आगे बढ़ रहा है, उसे गति देना सभी का पवित्र दायित्व है। यह प्रयास दुनिया की शुभ शक्तियों को एकजुट कर समाज को सन्मार्ग पर ले जाने का है। उन्होंने इस कार्य को जीवन के अंतिम क्षण तक जारी रखने का आह्वान किया।

