रायपुर, 20 अगस्त 2025। छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश अध्यक्ष सतीश थौरानी के नेतृत्व में 19 अगस्त 2025 को एक प्रतिनिधिमंडल ने जीएसटी आयुक्त पुष्पेंद्र कुमार मीणा से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित व्यापारियों की समस्याओं को आयुक्त के समक्ष रखना और उनके निराकरण के लिए सुझाव देना था। प्रतिनिधिमंडल ने जीएसटी रिटर्न फाइलिंग की जटिलताओं, रिफंड में देरी, और अधिकारियों द्वारा जांच से जुड़ी दिक्कतों जैसे मुद्दों को विस्तार से उठाया।
चेंबर संरक्षक श्रीचंद सुंद्रानी ने कहा कि यदि कोई अधिकारी व्यापारी के साथ गलत कार्यवाही करता है, तो उसे दंडित क्यों नहीं किया जाता, जबकि व्यापारी की छोटी-सी गलती पर तुरंत कार्रवाई और दंड लागू हो जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीएसटी का नाम सुनकर व्यापारी डरने लगे हैं, फिर भी छत्तीसगढ़ में जीएसटी संग्रहण सबसे अधिक है।
चेंबर अध्यक्ष सतीश थौरानी और छत्तीसगढ़ जीएसटी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश मिश्रा व महासचिव शिव सोनी ने सुझाव दिया कि प्रत्येक जिले में जीएसटी हेल्प डेस्क स्थापित किया जाए, जिसे आयुक्त ने स्वीकार किया। सीए रवि ग्वालानी ने कहा कि नोटिस के जरिए व्यापारियों पर अनुचित दबाव नहीं बनाना चाहिए, बल्कि सहजता से समाधान करना चाहिए।
सीए योगेश वल्र्यानी ने जीएसटी में कानून होने के बावजूद व्यवस्था की कमी पर चिंता जताई। चेंबर वाइस चेयरमैन चेतन तारवानी ने आयुक्त की संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि यह पहली बार है जब कोई कमिश्नर व्यापारियों की बात इतने ध्यान से सुन रहा है।
जीएसटी से जुड़ी इन समस्याओं पर चर्चा हुई
- जीएसटी अपील में व्यापारी के पक्ष में फैसला होने के बाद भी जमा 10% राशि की वापसी नहीं हो रही, क्योंकि अधिकारियों द्वारा अन्य अपीलों का हवाला दिया जाता है, जो न्यायसंगत नहीं है।
- धारा 21 के तहत कार्यवाही उचित है, लेकिन व्यवसाय स्थल पर जाकर बिना आदेश के राशि जमा करने का दबाव बनाना अनुचित है।
- अधिकारियों द्वारा क्रेडिट या कैश लेजर से डेबिट करने की वसूली प्रक्रिया धारा 78 और 79 के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(ग) के खिलाफ है।
- संयुक्त आयुक्त अजय देवांगन के कार्यकाल की 65 अपीलें अभी तक लंबित हैं, जिस पर उच्च अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।
- कम्पोजीशन डीलरों पर 1% कर की दर को 0.25% करने का सुझाव दिया गया, ताकि पंजीकृत व्यापारियों की संख्या बढ़े और राजस्व में वृद्धि हो।
जीएसटी आयुक्त पुष्पेंद्र मीणा ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि आगे से कैमरे बंद नहीं किए जाएंगे, मोबाइल नहीं छीना जाएगा, और व्यापारी अपने वकील को बुला सकेंगे। विभाग व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए सुझावों का स्वागत करता है।
बैठक में जीएसटी अधिकारी पी.एस. विंध्यराज, पी.आर. धुर्वे, निलिमा तिग्गा, संयुक्त आयुक्त नरेंद्र वर्मा, दीपक गिरी, याचना ताम्बरे, सुनील चौधरी, सोनल मिश्रा, भावना अली आदि उपस्थित थे। चेंबर की ओर से सतीश थौरानी, श्रीचंद सुंद्रानी, अमर गिदवानी, विजय मुकीम, चेतन तारवानी, राधा किशन सुंद्रानी, राजेश वासवानी, जसप्रीत सिंह सलूजा, लोकेश चंद्रकांत जैन, कन्हैया गुप्ता, दिलीप इसरानी, अमरदास खट्टर, जीतेंद्र शादीजा, तनेश आहूजा, जवाहर थारानी, रितेश वाधवा, धनेश मटलानी, अधिवक्ता दयाल राजपाल, सीए योगेश वल्र्यानी, रवि ग्वालानी, सरदार हरचरण सिंह साहनी, धरम भंसाली, सुनील पारख, निलेश सेठ, विनय गोलछा, संजय देशमुख, विजय गोयल, प्रेम पाहूजा, अमर भंसाली, रितेश सचदेव, अमर सचदेव, दिनेश जैन आदि मौजूद रहे। यह बैठक व्यापारियों और प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।













