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डॉ. अमित कुमार द्विवेदी को मिलेगा 2025 का टीचर्स नेशनल अवॉर्ड

डॉ. अमित कुमार द्विवेदी को मिलेगा 2025 का टीचर्स नेशनल अवॉर्ड

लखनऊ, 26 अगस्त 2025। उत्तर प्रदेश की पावन मिट्टी ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का डंका बजाया है। सीमांत जनपद कुशीनगर के छोटे से गांव चकिया दुबौली से निकलकर शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले डॉ. अमित कुमार द्विवेदी का नाम आज पूरे देश में गूंज रहा है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने उन्हें वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड टू टीचर्स के लिए चयनित किया है। यह सम्मान उन्हें 5 सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति के हाथों प्रदान किया जाएगा।

डॉ. द्विवेदी की उपलब्धियां यहीं तक सीमित नहीं हैं। उनके नवाचारपूर्ण प्रोजेक्ट ‘देवभूमि उद्यमिता योजना’ को पहले ही प्रतिष्ठित स्कॉच पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड के एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई) में लागू किया जा रहा है, जिसने युवाओं में उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान में डॉ. द्विवेदी लद्दाख के उच्च शिक्षा विभाग के लिए ‘एंटरप्राइजिंग लद्दाख’ अभियान के तहत वहां के युवाओं में उद्यमिता की संस्कृति विकसित करने का कार्य कर रहे हैं।

डॉ. अमित कुमार द्विवेदी का यह सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उनकी शुरुआती शिक्षा कुशीनगर के पडरौना ब्लॉक के सखवनिया बुजुर्ग गांव में हुई। उनके नाना और प्रख्यात शिक्षाविद पंडित श्रीकांत मिश्र, जो मठिया माधोपुर के निवासी थे, ने आजादी से पहले महात्मा गांधी इंटर कॉलेज की नींव रखी थी। यहीं से डॉ. द्विवेदी ने शिक्षा की पहली सीढ़ी चढ़ी। इसके बाद उन्होंने गोरक्षपीठ द्वारा संचालित महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज से कॉमर्स की पढ़ाई पूरी की और लखनऊ विश्वविद्यालय पहुंचे।

लखनऊ विश्वविद्यालय में पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिक्षाविद डॉ. दिनेश शर्मा के मार्गदर्शन में उन्होंने पीएचडी पूरी की। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक लखनऊ में शैक्षणिक कार्य किया और फिर आईआईएम अहमदाबाद में अपनी सेवाएं दीं। वर्तमान में वे ईडीआईआई अहमदाबाद से जुड़कर उद्यमिता शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

डॉ. द्विवेदी का शैक्षणिक और शोध कार्य भी प्रेरणादायी है। उन्होंने अब तक 40 से अधिक शोधपत्र, 10 ग्लोबल एंटरप्रेन्योरशिप मॉनिटर (जीईएम) राष्ट्रीय रिपोर्ट्स, चार पुस्तकें और कई केस स्टडीज लिखी हैं। उनके कार्य ने न केवल शैक्षणिक जगत में, बल्कि उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में भी नई दिशा प्रदान की है। देशभर के 21 चयनित शिक्षकों की सूची में उन्हें 15वां स्थान प्राप्त हुआ है, जो उनकी मेहनत और समर्पण का प्रमाण है।

डॉ. द्विवेदी की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे कुशीनगर और उत्तर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। उनके पिता बंका द्विवेदी भावुक होकर कहते हैं, यह हमारे लिए गर्व का क्षण है। अमित ने बचपन से ही पढ़ाई में लगन दिखाई। आज उसका नाम पूरे देश में गूंज रहा है, इससे बड़ा सुख और क्या हो सकता है।

उनकी माता कामना द्विवेदी कहती हैं, हमने अपने बेटे को संस्कार और मेहनत का महत्व सिखाया। आज वही मेहनत उसे इस मुकाम तक ले गई। यह उपलब्धि पूरे गांव, जिले, प्रदेश और देश की शान है। उनके मामा सरोजकांत का कहना है, गांव की प्रतिभा किसी से कम नहीं होती। अमित ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे कुशीनगर और उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है। युवा पीढ़ी को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।