क्या आपको मालूम है कि चीनी की मिठास हमारे जीवन में कैसे जहर घोल रही है। इसका सेवन हमारे शरीर में मोटापा तो बढ़ता ही है, दांत भी प्रभावित होते हैं। चीनी आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुकी है। मिठाइयां, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में मौजूद चीनी न केवल हमारी सेहत को प्रभावित कर रही है, बल्कि दांतों की सड़न (डेंटल कैरीज) का प्रमुख कारण भी बन रही है।
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बच्चों और युवाओं में दांतों की सड़न की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण चीनी का अत्यधिक सेवन है।
चीनी मुंह में मौजूद बैक्टीरिया के साथ मिलकर एसिड बनाती है, जो दांतों की ऊपरी परत (इनेमल) को नष्ट कर देती है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे दांतों में छेद और सड़न का कारण बनती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सुझाव दिया है कि दैनिक कैलोरी का केवल 10% हिस्सा ही चीनी से आना चाहिए, लेकिन भारत में लोग इससे कहीं अधिक चीनी का सेवन कर रहे हैं। खासकर बच्चों में मिठाइयों और फास्ट फूड की बढ़ती लोकप्रियता ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
दंत चिकित्सक डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में दांतों की सड़न के मामले 30% तक बढ़े हैं। इसका एक बड़ा कारण अनियमित ब्रशिंग और चीनी युक्त पदार्थों का देर रात तक सेवन है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसके सेवन को सीमित करने के साथ-साथ दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करना, नियमित दंत जांच और फ्लॉसिंग की आदत डालना जरूरी है।
लोगों में जागरूकता की कमी भी इस समस्या को बढ़ा रही है। कई माता-पिता अपने बच्चों को मिठाई और कोल्ड ड्रिंक्स बिना सोचे-समझे देते हैं, जिसका असर उनके दांतों पर पड़ता है। इसके अलावा, प्राकृतिक मिठास जैसे शहद या गुड़ को विकल्प के रूप में अपनाने की सलाह दी जा रही है।
इस समस्या से निपटने के लिए स्कूलों और समुदायों में जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है। मिठास भले ही जीभ को भाए, लेकिन इसके दुष्परिणाम दांतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। समय रहते सावधानी बरतना ही इस समस्या का समाधान है।

















