नई दिल्ली, 9 सितंबर 2025। आज शाम 5 बजे के बाद देश को 15वां उपराष्ट्रपति मिल जाएगा। सभी परिस्थितियां एनडीए कैंडिडेट राधाकृष्णन के पक्ष में हैं। वोटिंग जारी है, अभी तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, श्रीमती सोनिया गांधी, जेपी नडडा, राजनाथ सिंह समेत अनेक सांसद वोट डाल चुके हैं। शाम 5 बजे तक वोटिंग प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद मतगणना होगी।
बता दें उपराष्ट्रपति का पद जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने के बाद खाली हुआ है। उन्होंने 22 जुलाई अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस पीछे उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था। इस्तीफे के बाद धनखड़ ने कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल की संख्या 781 है। यह लोकसभा में 542 (एक रिक्ति सहित) और राज्यसभा में 239 (6 रिक्तियों सहित) को मिलाकर है। चुनाव में जीत के लिए बहुमत का आंकड़ा 391 वोट है। NDA के पास 422 सांसदों का समर्थन है, जो बहुमत से ज्यादा है। INDIA गठबंधन के पास 324 सांसदों का समर्थन है।हालांकि, इस बार INDIA गठबंधन पिछले चुनाव के मुकाबले काफी मजबूत है।
उपराष्ट्रपति चुनाव संविधान के अनुच्छेद 66 के तहत चुनाव आयोग की देखरेख में होता है। इसकी मतदान प्रणाली राष्ट्रपति, लोकसभा और विधानसभा चुनावों से अलग है। इसमें सांसद मतपत्र पर उम्मीदवारों के लिए अपनी पसंद अंकित करते हैं, जिसमें सांसद उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में क्रमबद्ध कर सकता है। चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एकल संक्रमणीय मत से होता है। चुनाव कागजी मतपत्रों पर होगा, जो गुप्त मतदान है। इसकी निगरानी एक रिटर्निंग ऑफिसर (वरिष्ठ संसदीय अधिकारी) करता है।
NDA ने सीपी राधाकृष्णन को कैंडिडेट बनाया है। वे मूलत: तमिलनाडु के रहने वाले हैं। तिरुप्पुर में 20 अक्टूबर, 1957 को उनका जन्म हुआ। पूरा नाम चन्द्रपुरम पोनुस्वामी राधाकृष्णन है। वे 16 साल की उम्र से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं। वह 31 जुलाई, 2024 से महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। इससे पहली वह फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक झारखंड और मार्च से जुलाई 2024 तक तेलंगाना के राज्यपाल रहे हैं। उन्होंने मार्च से अगस्त 2024 तक पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाला था।
विपक्ष यानि INDIA गठबंधन ने बी सुदर्शन रेड्डी को कैंडिडेट बनाया है। रेड्डी का जन्म 8 जुलाई, 1946 को आंध्र प्रदेश के रंगा रेड्डी जिले के अकुला मायलारम गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। कानून की पढ़ाई के बाद उन्होंने सिविल और संवैधानिक मामलों की पैरवी से अपना करियर शुरू किया। वे 1993 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश और 2 साल बाद न्यायाधीश बने। 2005 में गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और 2007 में सुप्रीम कोर्ट जज बने।
















