प्रतापगढ़, 8 नवंबर 2025। सर्वोदय सद्भावना संस्थान ने सर्वोदयी नेता पंडित सूर्यबली पांडेय का 105वां जन्मदिवस सद्भावना दिवस के रूप में मनाया। यह कार्यक्रम सेनानी ग्राम देवली स्थित संत निवास परसन पांडे का पुरवा में आयोजित हुआ। समारोह की अध्यक्षता लोकतंत्र रक्षक सेनानी पंडित रामसेवक त्रिपाठी एडवोकेट ने की। मुख्य अतिथि के रूप में उच्च न्यायालय प्रयागराज के पूर्व न्यायाधीश अरविंद त्रिपाठी मौजूद रहे।
वक्ताओं ने उन्हें निर्भीकता, दयालुता, करुणा और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति बताया। अरविंद त्रिपाठी ने कहा कि पांडेय जी जैसे कर्मठ, त्यागी और सच्चे राष्ट्रभक्त व्यक्ति करोड़ों में एक होते हैं। उन्होंने न केवल देश की आजादी के लिए जेल की यातना सही बल्कि स्वतंत्र भारत में भी सच्चाई और सिद्धांतों के लिए जेल गए। उन्होंने कहा कि माता-पिता और पूर्वजों की सेवा व सम्मान ही सच्चा राष्ट्रधर्म है, और पांडे जी का जीवन इसी भावना का आदर्श उदाहरण है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पंडित रामसेवक त्रिपाठी ने बताया कि जनपद प्रतापगढ़ के इतिहास में कुछ ही स्वतंत्रता सेनानी ऐसे हुए हैं जिन्होंने आजादी के बाद भी राष्ट्रहित में जेल की सजा पाई। इनमें डॉ. राजेश्वर सहाय त्रिपाठी एडवोकेट, पंडित सूर्यबली पांडेय एडवोकेट और स्वामी करपात्री जी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि 1975 के आपातकाल के दौरान दूसरी आजादी की लड़ाई प्रतापगढ़ में पंडित पांडे के नेतृत्व में लड़ी गई, जिसमें सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता उनके साथ जेल गए।
विशिष्ट अतिथि जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री श्री 1008 स्वामी करपात्री जी महाराज, अयोध्या धाम ने कहा कि पांडेय जी न केवल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे बल्कि उन्होंने जयप्रकाश आंदोलन को भी दिशा दी। वे प्रतापगढ़ के गांधी कहलाए जाने योग्य थे। देश हमेशा उनके योगदान को याद रखेगा। उन्होंने गरीबों और किसानों की लड़ाई लड़ी और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि सद्भावना एक ऐसा शब्द है जो सनातन धर्म की आत्मा से जुड़ा है, और पांडे जी ने जीवनभर इसी भावना को जिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक प्रवीण जी ने कहा कि पंडित पांडेय ने विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में जो योगदान दिया, वह अमर रहेगा। उन्होंने कहा, पांडेय जी ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित किया और आपातकाल के दौरान 19 माह तक जेल में रहे। उनके आदर्श हमें सच्चरित्रता और राष्ट्रनिष्ठा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
भाजपा नेता शिव प्रकाश मिश्रा सेनानी ने कहा कि 1977 में जनता पार्टी ने पांडेय जी को लोकसभा टिकट देने की पेशकश की, किंतु उन्होंने विनोबा जी की बात मानते हुए चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि चुनाव झगड़े की जड़ है। उन्होंने कहा कि हमारे पिता स्वर्गीय चंद्र दत्त सेनानी का पांडेय जी से गहरा आत्मीय संबंध था, वे सादगी और सत्य के प्रतीक थे।
लोकतंत्र रक्षक सेनानी डॉ. ईश्वर चंद्र शुक्ला ने बताया कि स्वामी श्री बैकुंठ धाम अलोपीबाग, प्रयाग के परम वैष्णव विद्वान ने पांडेय जी को दीक्षा देकर श्रीवैष्णव पंथ में दीक्षित किया था। उन्होंने विनोबा भावे और अपने साथी रामलखन पाठक तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकिंकर सरोज के साथ प्रतापगढ़ से शाहगंज तक पदयात्रा की थी। उन्होंने बताया कि पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्याय द्वारा स्थापित विद्यालयों के लिए पांडेय जी ने बाबू त्रिभुवन नाथ सिन्हा एडवोकेट के साथ भूदान की जमीन दान की थी, जहां आज भी शिक्षा का दीप जल रहा है।
कार्यक्रम में अयोध्या धाम से आए कई संतों और विद्वानों ने भाग लिया, जिनमें जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री श्री 1008 स्वामी श्री रामचंद्राचार्य पीठाधीश्वर (मुमुक्षु भवन, अयोध्या), महंत सीताराम शरण दास (साकेत भवन, अयोध्या), देवरहा बाबा के शिष्य जंगल बाबा (खरवईं), महंत राम पूजन तिवारी (जगत जननी धाम, बाराही क्षेत्र) प्रमुख थे। साथ ही भाजपा नेता डॉ. राकेश सिंह, वरिष्ठ सपा नेता संजय पांडे, राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी के मीडिया प्रभारी ज्ञान प्रकाश शुक्ला, एडवोकेट अनिल तिवारी महेश, कवि निर्झर प्रतापगढ़ी, लाल प्रताप सिंह व्यथित, हरिवंश शुक्ला शौर्य, कवियत्री कनक तिवारी और अन्य साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को भावनात्मक रंग दिया।
आयोजक ओमप्रकाश पांडेय अनिरुद्ध रामानुज दास द्वारा सभी अतिथियों को अंगवस्त्र, माल्यार्पण और रामानुज पंचांग भेंट कर सम्मानित किया गया। मंच संचालन आचार्य उमाकांत प्रधानाचार्य और ज्योतिषाचार्य कमलेश पांडेय (अमेठी) ने किया। संगीतकार रवि मिश्रा और बलदाऊ भैया ने अपने भजनों से भक्ति का वातावरण बना दिया।
समापन पर नारायणी रामानुज दासी, डॉ. अवंतिका पांडेय, डॉ. विवेक पांडेय, डॉ. अंकिता पांडेय, इंजीनियर पूजा पांडेय और आरविका पांडेय ने कहा कि हम उनके बताए रास्ते पर चलें, यही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।














