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छत्तीसगढ़ में गाइडलाइन दरों में रिफॉर्म से लाभ ही लाभ, जानें कैसे…

रायपुर, 8 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ में सरकार ने जमीन की खरीदी बिक्री की गाइडलाइन दरों में रिफॉर्म किया है। इस रिफॉर्म से लाभ ही लाभ है पर सरकार विरोधी लोग इसके खिलाफ नरेटिव बना रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इसका सच मीडिया के सामने रखा है। भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में 8 दिसंबर 2025 को आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार समग्र विकास की दिशा में निर्णायक कदम उठा रही है।

जनता, बिल्डर्स, व्यापारिक संगठनों और अन्य हितधारकों से मिले सुझावों, ज्ञापनों और प्रस्तावों के आधार पर राज्य में लागू नई गाइडलाइन दरों में कई महत्वपूर्ण और जन हितैषी सुधार किए गए हैं। नए निर्णय 8 दिसंबर से प्रभावी हो चुके हैं।

वित्त मंत्री ने बताया कि इन बदलावों से नगरीय और ग्रामीण-दोनों क्षेत्रों में संपत्ति खरीदने, बेचने और पंजीयन कराने की प्रक्रिया सरल होगी, साथ ही मध्यम वर्ग, किसानों और सामान्य नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी, शताब्दी पांडेय, किरण बघेल और उज्ज्वल दीपक भी उपस्थित थे।

नगरीय क्षेत्र में हुए बड़े बदलाव

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि नगरीय क्षेत्रों में 1400 वर्ग मीटर तक भूखंडों के लिए लागू इंक्रीमेंटल आधार पर गणना की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। अब नगर निगम क्षेत्रों में 50 डेसिमल, नगर पालिका क्षेत्रों में 37.5 डेसिमल और नगर पंचायत में 25 डेसिमल तक स्लैब दर से मूल्यांकन किया जाएगा। पूर्व की तरह स्लैब दर लागू होने से भूखंडों का मूल्यांकन सरल होगा और नागरिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि बहुमंजिला भवन, फ्लैट, दुकान और कार्यालयों के अंतरण में अब सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय बिल्ट-अप एरिया के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। यह प्रावधान मध्य प्रदेश शासनकाल से लागू था और लंबे समय से इसे हटाने की मांग हो रही थी। इससे वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा और नगर योजना में भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।

चौधरी ने कहा कि बहुमंजिला भवनों और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट और प्रथम तल पर 10 प्रतिशत की कमी तथा दूसरे तल व उससे ऊपर के तल पर 20 प्रतिशत कमी के साथ मूल्यांकन किया जाएगा। इससे मध्य और निम्न मध्य वर्ग को किफायती दर पर फ्लैट मिलेंगे। इसी तरह, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में 20 मीटर दूरी के पश्चात स्थित संपत्तियों के लिए 25 प्रतिशत कम दर पर मूल्यांकन का प्रावधान किया गया है।

गाइडलाइन दरों के पुनरीक्षण के निर्देश

वित्त मंत्री ने कहा कि जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का विश्लेषण कर केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड दरें जारी करता है। हाल ही में दरों में वृद्धि के बाद प्राप्त आपत्तियों और सुझावों को देखते हुए केंद्रीय बोर्ड ने निर्देश दिया है कि जिलों की समितियां 31 दिसंबर तक पुनरीक्षित प्रस्ताव फिर से भेजें। नया आदेश 8 दिसंबर से लागू है।

पंजीयन प्रक्रिया और जन हितैषी सुधार

वित्त मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पंजीयन प्रक्रिया को सरल और जनहितैषी बनाया जा रहा है। 20 नवंबर को लागू गाइडलाइन दरों में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जो नागरिकों के लिए राहत लेकर आए हैं।

11 बिंदुओं में जानें कैसे होगा लाभ

  1. नजूल, आबादी और परिवर्तित भूमि पर नई व्यवस्था

पहले इन जमीनों पर पूरी तरह वगर्मीटर दर से मूल्यांकन होता था। अब कृषि भूमि जैसा ही प्रावधान लागू होगा।
लाभ: रायपुर के हेमू कल्याणी वार्ड में 0.405 हेक्टेयर भूमि का मूल्य पहले 78 करोड़ रुपये होता था, जबकि अब 2.4 करोड़ रुपये होगा।

  1. ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तित भूमि पर ढाई गुना दर समाप्त

पहले सिंचित भूमि का ढाई गुना मूल्य लगता था।
लाभ: बिलासपुर के सेंदरी गांव में एक एकड़ भूमि की दर 1.60 करोड़ है, जो पहले 4 करोड़ रुपये माना जाता था। अब सिर्फ 1.60 करोड़ में मूल्यांकन होगा।

  1. दो फसली भूमि पर 25% अतिरिक्त मूल्य समाप्त

पहले दो फसली भूमि पर 25% अतिरिक्त मूल्य लिया जाता था। अब इसे समाप्त कर दिया गया है।
लाभ: मोतीपुर की 2.44 करोड़/हेक्टेयर दर अब बिना किसी वृद्धि के मान्य होगी। पहले यह 3.05 करोड़ तक पहुंच जाती थी।

  1. ट्यूबवेल, बोरवेल और कुएं पर अतिरिक्त राशि खत्म

पहले ट्यूबवेल पर 85,000 और कुएं पर 70,000 रुपये जोड़े जाते थे। अब यह पूरी तरह समाप्त है।

  1. वाणिज्यिक फसलों पर अतिरिक्त 25% मूल्य समाप्त

अब केला, पपीता, गन्ना जैसी फसलों पर अतिरिक्त राशि नहीं जोड़ी जाएगी।

  1. भूमि पर वृक्षों का मूल्य जोड़ने की व्यवस्था समाप्त

पहले पेड़ों का मूल्य भूमि मूल्य में जोड़कर रजिस्ट्री शुल्क बढ़ जाता था।
लाभ: कांकेर में 600 वृक्षों वाले भूखंड पर 78 लाख का अतिरिक्त मूल्य जोड़ना पड़ता था। अब यह शून्य हो गया। इससे 8.58 लाख रुपये तक की शुल्क राहत मिली। इससे पेड़ काटने की प्रवृत्ति भी रुकेगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

  1. शहर से लगे गांवों में हेक्टेयर आधारित मूल्यांकन

पहले 25-37.5 डिसमिल भूमि का मूल्यांकन वगर्मीटर दर से होता था।
लाभ: रायपुर के बरौदा में 37.5 डिसमिल भूमि का मूल्य 26.75 लाख के बजाय अब सिर्फ 6.30 लाख होगा।

  1. तालाब, मछली टैंक पर 1.5 गुना दर समाप्त
    लाभ : अब जमीन पर तालाब होने से मूल्यांकन नहीं बढ़ेगा।
  2. कृषि भूमि की दरों में सरलीकरण
  • पहले तीन दरें लागू थीं—मुख्य मार्ग, सिंचित, असिंचित।
  • अब केवल दो दरें लागू होंगी—मुख्य मार्ग और सिंचित।
  • असिंचित भूमि का मूल्यांकन सिंचित दर से 20% कम पर होगा।
  1. बाउंड्री वॉल और प्लिंथ लेवल पर अतिरिक्त दर समाप्त
    अब बाउंड्री वॉल (400 रुपये/फुट) और प्लिंथ लेवल (300 रुपये/वगर्फुट) की अतिरिक्त राशि पूरी तरह हटा दी गई है।
  2. निर्मित संपत्तियों की मूल्यांकन दरों में सरलीकरण
    पहले 21 प्रकार की दरें लागू थीं। अब सिर्फ दो प्रकार की दरें लागू होंगी। इससे संपत्ति का मूल्यांकन बेहद आसान हो गया है और आमजन को भ्रम से मुक्ति मिलेगी।