रायपुर, 20 दिसंबर 2025। किसान संगठनों के एक दल ने अधिवक्ता आकाश हिन्दुत्व की अगुवाई में प्रेस क्लब रायपुर में प्रेस कांफ्रेंस किया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने बिना किसी जमीनी सर्वे, स्थानीय परिस्थितियों और वास्तविक बाजार मूल्य का आकलन किए बिना भूमि की गाइडलाइन दरों में भारी बढ़ोतरी कर दिया है। इससे प्रदेशभर के किसानों में गहरा असंतोष है।
किसान संगठनों का आरोप है कि कई क्षेत्रों में गाइडलाइन दरों में 100 से 600 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी गई है। जबकि वहां न तो बुनियादी सुविधाएं मौजूद है और न ही जमीन की वास्तविक बाजार मांग है। इसके बावजूद उन क्षेत्रों को उच्च श्रेणी में रखकर दरें बढ़ा दी गई जो किसानों के साथ अन्याय है।
जमीन के रेट बढ़ने से रजिस्ट्री, स्टाम्प ड्यूटी, नामांतरण, बैंक ऋण, पारिवारिक बंटवारे और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं महंगी हो गई हैं। इससे छोटे और मध्यम किसानों के साथ-साथ मध्यम व निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए जमीन और आवास तक पहुंच लगभग असंभव हो जाएगी।
किसानों ने बताया कि अचानक हुई इस वृद्धि से जमीन की खरीदी-विक्री लगभग ठप हो गई है। कृषि भूमि, छोटे व्यवसाय और पारंपरिक प्रॉपर्टी कारोबार प्रभावित हो रहे हैं, जिससे बेरोजगारी बढ़ने की आशंका है। कई किसान अपनी जरूरी जरूरतों इलाज, बच्चों की पढ़ाई, शादी या गृह निर्माण के लिए भी जमीन नहीं बेच पा रहे हैं।
किसान संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि नई गाइडलाइन में नेशनल हाइवे, स्टेट हाइवे, प्रधानमंत्री सड़क और गांव के पहुंच मार्ग सभी को मुख्य मार्ग मान लिया गया है, जो तर्कसंगत नहीं है।
संगठनों का कहना है कि भूमि केवल संपत्ति नहीं, बल्कि किसानों के जीवन, रोजगार और भविष्य का आधार है। बिना व्यापक जन-परामर्श और बाजार अध्ययन के लिया गया यह फैसला जनभावनाओं के विपरीत है। इससे न्यायिक विवाद बढ़ेंगे और प्रशासनिक बोझ भी बढ़ेगा।
किसानों की प्रमुख मांगें
- बढ़ाई गई गाइडलाइन दरों को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए।
- सभी जिलों और क्षेत्रों में वास्तविक जमीनी सर्वे कराया जाए।
- किसान संगठनों, जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों से चर्चा के बाद ही नई दरें तय हों।
- पुनर्विचार की प्रक्रिया पूरी होने तक पूर्ववर्ती दरों पर ही व्यवहारिक वृद्धि के साथ काम करने की अनुमति दी जाए।
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