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प्रतापगढ़ जेल में नवाचार, कैदी बना रहे आंवला जूस-मुरब्बा और अचार

प्रतापगढ़ जेल में नवाचार, कैदी बना रहे आंवला जूस-मुरब्बा और अचार

प्रतापगढ़, 23 दिसंबर 2025। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद की जिला कारागार इन दिनों अपने एक अनोखे नवाचार को लेकर चर्चा में है। यहां बंदी अब केवल सजा नहीं काट रहे, बल्कि आत्मनिर्भरता और कौशल विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। जेल परिसर में संचालित आंवला प्रसंस्करण केंद्र में कैदी आंवले का जूस, मुरब्बा, अचार और बर्फी जैसे उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जो सुधारात्मक कारागार व्यवस्था का सशक्त उदाहरण बनता जा रहा है।

22 दिसंबर को जनपद न्यायाधीश राजीव कमल पाण्डेय, जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी, पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुमुद उपाध्याय ने संयुक्त रूप से जिला कारागार का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सभी अधिकारियों ने जेल में संचालित आंवला प्रसंस्करण केंद्र का अवलोकन किया और वहां तैयार किए जा रहे उत्पादों की गुणवत्ता और प्रक्रिया की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बंदियों द्वारा निर्मित आंवला जूस, आंवला अचार, आंवला मुरब्बा और आंवला बर्फी का बारीकी से अवलोकन किया। उत्पादों की पैकिंग, स्वच्छता और प्रसंस्करण की विधि को देखकर अधिकारियों ने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास बंदियों के मानसिक सुधार के साथ-साथ उन्हें रोजगारपरक कौशल भी प्रदान करते हैं, जिससे वे रिहाई के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।

यह आंवला प्रसंस्करण केंद्र उत्तर प्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना की तर्ज पर कारागार विभाग द्वारा संचालित ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ योजना के अंतर्गत स्थापित किया गया है। इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक जेल में स्थानीय संसाधनों पर आधारित किसी एक उत्पाद का निर्माण कर बंदियों को स्वरोजगार की दिशा में प्रशिक्षित करना है।

जेल प्रशासन के अनुसार, आंवला उत्पादों के निर्माण से बंदियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे न केवल उनका समय सकारात्मक गतिविधियों में लग रहा है, बल्कि उन्हें अनुशासन, टीमवर्क और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण गुण भी सीखने को मिल रहे हैं। उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय का एक हिस्सा बंदियों के खातों में जमा किया जाता है, जो उनके भविष्य के लिए सहारा बनता है।