प्रतापगढ़, 1 मई 2026। आध्यात्मिक जगत के प्रदीप्त नक्षत्र, आनंद मार्ग के प्रवर्तक और महान दार्शनिक सद्गुरु श्री श्री आनंदमूर्ति जी का 105वां आविर्भाव दिवस प्रतापगढ़ में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाया गया। आनंद मार्ग प्रचारक संघ की स्थानीय इकाई द्वारा इस पावन अवसर को ‘आनंद पूर्णिमा’ के रूप में मनाते हुए मानवीय सेवा के विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
आनंद मार्ग के सिद्धांतों में ‘सेवा’ को ईश्वर की सच्ची आराधना माना गया है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए संघ की प्रतापगढ़ शाखा द्वारा नगर के महुली क्षेत्र स्थित वृद्धाश्रम में एक विशेष सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान आश्रम में रह रहे लगभग 80 लाभार्थियों के बीच फल, बिस्कुट, मिष्ठान और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्रियों का वितरण किया गया।
आश्रम के बुजुर्गों के चेहरों पर बिखरी मुस्कान ने कार्यक्रम की सार्थकता को सिद्ध किया। आनंद मार्गियों ने न केवल सामग्री वितरित की, बल्कि वृद्धों के साथ समय बिताकर उनके अनुभवों को साझा किया और उन्हें संबल प्रदान किया।
डॉ. राम चन्द्र मिश्र की उपस्थिति प्रेरणादायी रही
इस पूरे आयोजन का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पक्ष आनंद मार्ग के प्रख्यात तात्विक डॉ. राम चन्द्र मिश्र की उपस्थिति रही। स्वास्थ्य कारणों से अस्वस्थ होने के बावजूद, डॉ. मिश्र ने अपने गुरु के प्रति अटूट निष्ठा दिखाते हुए पूरे कार्यक्रम में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की।
अस्वस्थता की अवस्था में भी उनके चेहरे पर एक विशेष तेज था, जो उपस्थित अनुयायियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। उन्होंने आश्रम के लाभार्थियों और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री श्री आनंदमूर्ति जी (जिन्हें भक्त प्यार से ‘श्री श्री आनंदमूर्ति जी’ या ‘बाबा’ कहते हैं) के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में डॉ. राम चन्द्र मिश्र ने कहा कि आनंद मार्ग का मूल मंत्र ‘आत्ममोक्षार्थं जगद्धिताय च’ अर्थात स्वयं की मुक्ति और जगत का कल्याण है। उन्होंने बताया कि श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने समाज को एक ऐसा वैज्ञानिक मार्ग दिखाया है जिसमें भक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी का अनूठा संगम है।
डॉ. मिश्र ने आनंद मार्ग द्वारा वैश्विक स्तर पर संचालित किए जा रहे विभिन्न सेवामूलक प्रकल्पों जैसे अनाथालय, विद्यालय, और आपदा राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाबा का दर्शन केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक शोषण मुक्त समाज की वकालत करता है जो मानवता के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।
वरिष्ठ मार्गियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम को सफल बनाने में आनंद मार्ग प्रचारक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों और सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर संस्था के वरिष्ठ मार्गी पीसी पाण्डेय, भुक्ति प्रधान रमेश तिवारी, रमेश पाण्डेय, जन्मेजय और राजीव सहित भारी संख्या में अनुयायी उपस्थित रहे।
सभी मार्गियों ने सामूहिक साधना और कीर्तन के माध्यम से वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम के दौरान ‘बाबा नाम केवलम’ के कीर्तन की गूंज से महुली क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया
कार्यक्रम के समापन सत्र में औपचारिकता निभाते हुए संस्था की ओर से आभार व्यक्त किया गया। वृद्धाश्रम के प्रबंधक अम्बिका प्रसाद विश्वकर्मा और आश्रम के सभी लाभार्थियों के प्रति उनके सहयोग और आत्मीयता के लिए धन्यवाद ज्ञापन किया गया। संघ के सदस्यों ने आश्रम प्रबंधन के प्रयासों की सराहना की, जो समाज के उपेक्षित वर्ग को आश्रय और सम्मान प्रदान कर रहे हैं।
1 मई का दिन आनंद मार्गियों के लिए केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के संकल्प को दोहराने का दिन है। प्रतापगढ़ में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि वास्तविक आध्यात्मिकता मंदिर या आश्रम की दीवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पीड़ित मानवता की सेवा में निहित है।