भोजली महोत्सव में लिया जल, जमीन, जीवन और खेती-किसानी बचाने का संकल्प

पंडरिया,  31 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के ग्राम पंडरिया में युवा किसान संघर्ष समिति द्वारा भोजली महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर किसान अधिकार संघर्ष समिति के पदाधिकारी, सदस्यगण, युवा साथी, ग्रामवासी एवं क्षेत्रवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में समिति के संरक्षक एवं पूर्व विधायक गिरवर जंघेल, वरिष्ठ अधिवक्ता मोतीलाल जंघेल, समिति अध्यक्ष श्रीमती लुकेश्वरी जंघेल, सचिव श्रीमती प्रियंका जंघेल सहित समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। उपाध्यक्षों में कामदेव जंघेल, संजू चंदेल, मन्नू चंदेल, बिरेंद्र जंघेल एवं प्रमोद सिंह ठाकुर तथा कोषाध्यक्ष श्रवण जंघेल एवं नोहर जंघेल उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में समिति सदस्य मुकेश पटेल, कैलाश जंघेल, केदार जंघेल, डॉ. नेतराम जंघेल, अशोक जंघेल, प्रेमलाल जंघेल, विष्णु मंडल , कुमार मंडल, भूखण सहित युवा साथी हुकुम जंघेल, सौरभ, विक्रम, चिरंजय, वेदप्रकाश, लक्की, सागर एवं भूषण तथा बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं क्षेत्रवासी शामिल हुए।

समिति अध्यक्ष श्रीमती लुकेश्वरी जंघेल ने कहा कि भोजली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी मिट्टी, खेती-किसानी, हरियाली और प्रकृति से जुड़ी हमारी जीवन संस्कृति का प्रतीक है। भोजली में हम अच्छी फसल, खुशहाली और समृद्धि की कामना करते हैं। किसान जिस तरह अपने खेत में धान की फसल को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए उसमें उग आई करगा (खरपतवार) को निकालता है, उसी तरह आज हमें भी अपनी जल, जमीन, जंगल, पर्यावरण और खेती-किसानी को नुकसान पहुंचाने वाली हर चुनौती के प्रति सजग होना होगा।

उन्होंने कहा कि हमारी जमीन केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों की विरासत है; खेत केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि किसान के जीवन और सम्मान का आधार है। इसलिए विकास के नाम पर यदि हमारी खेती, जलस्रोत, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पर संकट आता है, तो उसका शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना हमारा अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है।

वहीं समिति के संरक्षक एवं पूर्व विधायक श्री गिरवर जंघेल ने कहा कि भोजली पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी खेती-किसानी, हरियाली, प्रकृति और खुशहाल भविष्य का प्रतीक है। आज जब किसान अपने खेतों में लहलहाती फसलों और हरियाली की कामना कर रहे हैं, ऐसे समय में क्षेत्र की जल, जीवन, जमीन और खेती-किसानी पर मंडरा रहे संकट ने सभी को चिंतित कर दिया है।

उन्होंने क्षेत्र में प्रस्तावित श्री सीमेंट की खदान एवं फैक्ट्री का विरोध करते हुए कहा कि यह समय किसी एक व्यक्ति, गांव या समाज का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के अस्तित्व, पर्यावरण, किसानों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा का समय है। उन्होंने सभी क्षेत्रवासियों से आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट, संगठित और मजबूती के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने क्षेत्र की हरियाली, खेती-किसानी, जल, जीवन,जमीन की रक्षा के लिए एकजुट होकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने का संकल्प लिया।