भारतीय रेलवे ने बड़ा बदलावा किया है। यह बदलाव नमक के परिवहन पर केंद्रित है। भारत दुनिया में नमक के सबसे बड़ा उत्पादक देश है। दुनिया में नमक के निर्यातकों में भी भारत पहले नंबर पर है। देश में नमक का उत्पादन करने वाले तीन प्रमुख राज्य तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान हैं। भारत में सालाना लगभग 35 मिलियन टन नमक का उत्पादन होता है। इनमें से, लगभग 9.2 मिलियन टन प्रति वर्ष रेल द्वारा पहुंचाया जाता है।
नमक के परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी उसके उपयोग के अनुसार अलग-अलग होती है। औद्योगिक नमक के लिए यह लगभग 25 प्रतिशत है। मानव उपभोग के लिए इस्तेमाल होने वाले नमक के लिए यह लगभग 65 प्रतिशत है। रेलवे द्वारा पहुंचाए जाने वाले कुल नमक का 62 प्रतिशत हिस्सा 1,000 से 2,500 किलोमीटर की दूरी तय करता है, जिससे यह खंड रेल परिवहन के लिए बेहद उपयुक्त बन जाता है।
नमक उत्पादकों और ट्रांसपोर्टरों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श में कई प्रमुख समस्याओं की पहचान की गई। इनमें वैगनों का अनुपयुक्त डिज़ाइन, नमक के कारण वैगनों में जंग लगना, तिरपाल से ढके होने के बावजूद खुले वैगनों में पानी का रिसाव होना, और सामान की कई बार लोडिंग-अनलोडिंग के कारण लागत में वृद्धि और नुकसान होना शामिल हैं।
इन समस्याओं को हल करने के लिए अब स्टेनलेस स्टील से बना, ऊपर से लोड होने वाला और बगल से खाली होने वाला कंटेनर सिस्टम सफलतापूर्वक विकसित किया गया है। यह कंटेनर जंग से बचाने के लिए स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है। इसमें ऊपर से लोड करने के लिए फ्लैप तथा बगल से खाली करने के लिए हाइड्रोलिक तंत्र लगा है, जिससे गंतव्य स्थान पर ट्रकों में नमक को आसानी से अनलोड किया जा सकता है।
अब नमक उत्पादन वाली जगहों पर सीधे लोडिंग के लिए कंटेनर रखे जा सकते हैं। फिर इन कंटेनरों को उठाकर कंटेनर ट्रेनों में लोड किया जा सकता है। मंज़िल पर पहुंचने पर, कंटेनरों को उतारकर गोदामों या वेयरहाउस में रखा जा सकता है, और ज़रूरत के हिसाब से उन्हें खाली किया जा सकता है। इंडस्ट्री ने इसे काफी पसंद किया है।
