नई दिल्ली, 28 दिसंबर 2025। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा है कि आने वाले समय में भारत द्वारा किए जाने वाले मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में सामाजिक सुरक्षा के संरक्षण से जुड़े प्रावधान शामिल किए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशों में कार्यरत भारतीय कर्मचारी भारत लौटने के बाद भी अपने भविष्य निधि (पीएफ) योगदान को बनाए रख सकें और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने बताया कि इस दिशा में भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसमें भारतीय कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
डॉ. मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव देखा है। वर्ष 2014 से पहले अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुसार भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज मात्र 19 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर 64 प्रतिशत हो गई है। यह वृद्धि न केवल योजनाओं के विस्तार का परिणाम है, बल्कि सरकार की समावेशी नीति और श्रमिकों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश के लगभग 94 करोड़ नागरिक किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में आ चुके हैं। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा कवरेज के मामले में भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ (आईएसएसए) जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक संगठन भी भारत की इस उपलब्धि की सराहना कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक 100 करोड़ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज के अंतर्गत लाना है। इसके लिए ईपीएफओ, ईएसआईसी और अन्य कल्याणकारी योजनाओं को अधिक सरल, डिजिटल और सुलभ बनाया जा रहा है, ताकि असंगठित और संगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को समान लाभ मिल सके।
डॉ. मांडविया ने जोर देते हुए कहा कि एफटीए में सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों को शामिल करना केवल आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि विदेश में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों के सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की गारंटी है। यह पहल हर मजदूर को सामाजिक सुरक्षा का अधिकार देने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम है।

















