नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026। छुट्टी के विवाद में रक्षक भक्षक बन बैठा। उसने अपने ही असिस्टेंट कमांडेंट समेत 4 साथियों की जान ले ली। घटना हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे कठुआ जिले की है। यहां सीआईएसएफ के जवान अवधेश सिंह ने इस वारदात को अंजाम दिया। इस घटना से पूरे देश में शोक है।
मिली जानकारी के मुताबिक कठुआ जिले के हट्ट माश्का गांव में सेवा-2 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट स्थित है। इसकी सुरक्षा में सीआईएसएफ के जवान तैनात हैं। मंगलवार 29 सितंबर 2026 की शाम करीब सात बजे हेड कांस्टेबल अवधेश सिंह ने छुट्टी के विवाद में कैंप में फायरिंग शुरू कर दी। एसएसपी कठुआ मोहिता शर्मा के अनुसार गोली लगने से असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडेय, सब इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार की मौत हो गई है।
पुलिस के अनुसार आरोपी अवधेश सिंह को हिरासत में ले लिया गया है। पूछताछ में उसने बताया कि लंबे समय से छुट्टी के लिए आवेदन कर रहा था। लेकिन किसी न किसी कारण से छुट्टी रद कर दी जा रही थी। मंगलवार को भी छुट्टी को लेकर ही विवाद शुरू हुआ। गुस्से में आकर उसने शाम 7:00 बजे सर्विस राइफल से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से असिस्टेंट कमांडेंट एवं कंपनी कमांडर अंकित कुमार पांडेय, सब इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप घायल हो गए। गंभीर हालत में सभी को हिमाचल के चंबा जिला स्थित राष्ट्रीय जलविद्युत निगम लिमिटेड (एनएचपीसी) के अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया। सभी के शवों को हट्ट माश्का से सटे हिमाचल के एनएचपीसी की दूसरी परियोजना के खैरी अस्पताल में शिफ्ट करवा दिया गया है।
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के सूत्रों व पुलिस के अनुसार आरोपी हेड कांस्टेबल अवधेश सिंह ने एके-47 राइफल से फायरिंग की है। उसके पास 150 राउंड गोलियां थीं। गुस्से में आकर उसने अंधाधुंध फायरिंग की। इस बीच सामने जो आया उसे निशाना बनाया। विवाद की शुरुआत असिस्टेंट कमांडेंट एवं कंपनी कमांडर अंकित कुमार पांडेय से हुई थी। अवधेश सिंह 2009 में सीआईएसएफ में भर्ती हुआ था।
