नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026। पुलिस स्मृति दिवस शब्द हमारे कानों में गूंजता है तो सवाल उठ खड़ा होता हैं कि आखिर पुलिस स्मृति दिवस क्या है, इसे क्यों मनाते हैं। आज हम इस विषय पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे।
क्या है पुलिस स्मृति दिवस
घटना 21 अक्टूबर 1959 की है। उस दिन लद्दाख के ‘हॉट स्प्रिंग्स’ में भारतीय पुलिस बलों की एक टुकड़ी गश्त पर निकली थी। घात लगाकर बैठे चीनी सैनिकों ने भारतीय पुलिस बलों की इस टुकड़ी पर अचानक हमला कर दिया था। भारतीय पुलिस बल के जवानों ने इस विषम स्थिति में भी मुकाबला किया। चीनी सैनिकों की गोलीबारी में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के 10 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। इन्हीं बहादुर पुलिसकर्मियों की शहादत और देश के लिए उनकी सेवाओं के सम्मान में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।
कब से शुरू हुई पुलिस स्मृति दिवस की परंपरा
पुलिस स्मृति दिवस मनाये जाने की परंपरा की शुरुआत वर्ष 1960 से हुई। जनवरी 1960 में आयोजित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों के वार्षिक सम्मेलन में हर साल 21 अक्टूबर को ‘पुलिस स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था।
पुलिस स्मृति में अब तक क्या हुआ
पुलिसकर्मियों द्वारा दिए गए बलिदान तथा राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता बनाए रखने में पुलिस की उत्कृष्ट भूमिका का सम्मान करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुलिस स्मृति दिवस, 2018 के अवसर पर चाणक्यपुरी, नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक (NPM) देश को समर्पित किया।
यह स्मारक पुलिस बलों में राष्ट्रीय पहचान, गर्व, उद्देश्यों में एकरूपता, एक समान इतिहास और भविष्य की भावना भरने के साथ-साथ उनकी इस प्रतिबद्धता को भी और मजबूत करता है कि उन्हें अपने प्राणों की कीमत पर भी देश की रक्षा करनी है।
पुलिस स्मारक एक नजर में
- पुलिस स्मारक में एक केंद्रीय शिल्पकृति के अलावा ‘शौर्य की दीवार’ तथा एक संग्रहालय भी है।
- केंद्रीय शिल्पकृति के रूप में मौजूद एक 30 फुट ऊँचा ग्रेनाइट का एकल पाषाण खंड पुलिस कर्मियों की शक्ति, विनम्रता और नि:स्वार्थ सेवा का प्रतीक है।
- इसी प्रकार ’शौर्य की दीवार’ जिस पर शहीदों के नाम उत्कीर्ण हैं, कर्तव्य के पथ पर अपने प्राण न्यौछावर करने वाले पुलिस कर्मियों की बहादुरी और बलिदान के अचल प्रतीक के रूप में उपस्थित है।
- यहॉं मौजूद संग्रहालय की संकल्पना में भारतीय पुलिस व्यवस्था के इतिहास और विकास यात्रा के दर्शन होते है।
- यह स्थान पुलिस बल और आम नागरिकों, दोनों के मन में एक तीर्थ जैसा आदर रखता है।
- यह स्मारक आम जनता के लिए सोमवार के अलावा अन्य सभी दिन खुला रहता है।
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) द्वारा प्रत्येक शनिवार और रविवार को सूर्यास्त से एक घंटा पूर्व यहॉं बैंड, परेड और रिट्रीट समारोह का आयोजन भी किया जाता है।
पुलिस स्मृति दिवस
21 अक्तूबर को देश भर में शहीद पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है जबकि मुख्य कार्यक्रम राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में आयोजित किया जाता है, जिसकी अध्यक्षता परंपरागत रूप से केन्द्रीय गृह मंत्री द्वारा की जाती है। कार्यक्रम में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और दिल्ली पुलिस की एक संयुक्त परेड भी आयोजित की जाती है। गृह मंत्री, गृह राज्य मंत्री, सांसदों, CAPF/CPO प्रमुखों द्वारा शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की जाती है। इसके पश्चात्, गृह मंत्री शहीदों को स्मरण करते हुए उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हैं और पुलिस व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हैं।
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त महानिदेशक, पुलिस अधिकारी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होते है। यह कार्यक्रम हॉट स्प्रिंग्स के शहीदों को समर्पित वेदिका पर गृह मंत्री द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित किए जाने के साथ संपन्न होता है।
पुलिस स्मृति दिवस के पश्चात् 22 से 30 अक्तूबर के बीच CAPFs/CPOs द्वारा राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर विभिन्न स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें शहीदों के परिजनों को स्मारक पर आमंत्रित करना, पुलिस बैंड डिस्पले, मोटर साईकल रैली, शहीदों के निमित्त दौड़ आदि का आयोजन करने के साथ-साथ पुलिस बल कर्मियों के बलिदान, शौर्य तथा सेवा को दर्शाने वाली फिल्में भी दिखाई जाती है। इस अवधि के दौरान सभी पुलिस बलों द्वारा देश भर में इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
