नई दिल्ली, 22 जून 2025। दिव्यांग पायल यादव की चर्चा देश भर में हैं। राजस्थान के अलवर जिले के मुंडनकला गांव की पायल यादव की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता। मात्र 6 वर्ष की आयु में एक हाई टेंशन करंट हादसे में पायल ने अपने दोनों हाथ खो दिए। इस त्रासदी ने उनके जीवन को चुनौतियों से भर दिया, लेकिन पायल ने हिम्मत नहीं हारी। अपनी अटूट इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने पैरों से लिखना सीखा और 2025 में राजस्थान बोर्ड की 10वीं परीक्षा में 600 में से 600 अंक हासिल किए।
पायल का यह सफर आसान नहीं था। दोनों हाथ खोने के बाद दैनिक कार्य, जैसे खाना खाना या लिखना, उनके लिए कठिन हो गए। कृत्रिम हाथों के बजाय, उन्होंने पैरों से लिखने का अभ्यास शुरू किया। घंटों मेहनत और दर्द के बावजूद, उनकी लिखावट इतनी सुंदर हुई कि परीक्षकों को आश्चर्य हुआ। सामाजिक पूर्वाग्रहों और ग्रामीण क्षेत्र की सीमित सुविधाओं के बावजूद, पायल ने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा।
उनके परिवार और शिक्षकों का समर्थन उनकी सफलता का आधार बना। माता-पिता ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया, जबकि शिक्षकों ने विशेष मार्गदर्शन दिया। पायल की यह उपलब्धि न केवल उनके गांव, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उनका सपना IAS अधिकारी बनना है, और यह उपलब्धि उनके इस सपने की ओर पहला कदम है। पायल की कहानी हमें सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से कोई भी बाधा पार की जा सकती है।