चातुर्मास में संतों के संग समागम करना चाहिए

प्रतापगढ़, 24 जुलाई 2026। रामानुज आश्रम धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामनुजदास ने कहा है कि दिनांक 25 जुलाई 2026 आषाढ शुक्ल पक्ष की एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। यह चातुर्मास कार्तिक मास शुक्ल पक्ष 20 नवंबर 2026 तक प्रबोधिनी एकादशी के दिन तक रहेगा।

इस अवधि में ठाकुर जी का भजन कीर्तन तथा कथा श्रवण करना चाहिए। संतो के संग मिलकर संत समागम करना चाहिए। भगवान एक रूप में क्षीरसागर में से शेषनाग की शैय्या पर विराजमान रहते हैं माता लक्ष्मी जी आपका कैकंर्य करती रहती हैं। दूसरे रुप में भगवान श्रीमन्नारायण वामनावतार में राजा बलि को दिए हुए अपने वचन के अनुसार सुतल लोक में वास करते हैं और शयन करते हैं।

शयन का मतलब भगवान योग निद्रा में रहते हैं सोते नहीं है क्योंकि ठाकुर जी सो जाएंगे तो सारी सृष्टि सो जाएगी। चातुर्मास में मांस मदिरा एवं तामसी भोजन नहीं करना चाहिए। झूठ बिल्कुल नहीं बोलना चाहिए।