गुरु-शिष्य परंपरा भारत की संस्कृति का पवित्र हिस्सा: मो. सज्जाद

रायपुर, 5 सितंबर 2026। गुरु-शिष्य परंपरा भारत की संस्कृति का एक अहम और पवित्र हिस्सा है। जीवन के सबसे पहले गुरु हमारे माता-पिता होते हैं। इसके बाद जीवन को सँवारने में शिक्षक बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत में प्राचीन समय से ही गुरु व शिक्षक परंपरा चली आ रही है। जीने का असली सलीका हमें शिक्षक ही सिखाते हैं। शिक्षक हमें सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। समाज में गुरुजनों का सम्मान करना बेहद जरुरी है जिससे आने वाली पीढ़ी शिक्षक को आदर्श मानकर अपना भविष्य उज्जवल कर सके।

यह बातें मो. सज्जाद खान ने कही। मो. सज्जाद खान अवाम-ए-हिन्द सोशल वेलफेयर कमेटी के संस्थापक अध्यक्ष हैं। प्रत्येक वर्ष संस्था अपने रामनगर स्थित कार्यालय पर शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान कार्यक्रम आयोजित करती है। इस बार भी यह दिन उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम आयोजित कर समाज एवं शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

जिन शिक्षकों को सम्मानित किया गया उनमें प्रधान पाठिका श्रीमती सुनिता लांजेकार, लक्ष्मी राव, स्टेनली दास, तस्मीन खान, सज्जो खान, जसबीर कौर समेत अन्य गुरुजन शामिल रहे। इन सभी को संस्थापक मोहम्मद सज्ज़ाद खान ने पुष्पमाला, श्रीफल, शाल एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनकी सेवाओं की प्रशंसा करते हुए सम्मान किया।

कार्यक्रम में संस्थापक, मो. सज्जाद खान के साथ राजेन्द्र शर्मा, पंडित अनिल शुक्ल, जुबैर खान, रिंकी शुक्ला, कुलविंदर सिंह, डॉ. गुलनार आलम, सलमा बेगम, सुरभि जैन, वसीम, नंदा रामटेके सहित अन्य सदस्यों ने अपना सहयोग प्रदान किया।